Saturday, December 3, 2022
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    यूपी में है ‘एसपीजी प्रोटेक्शन’ वाले आईएएस और आईपीएस अफसरों की मौज

    बना छह साल से पंचमतल पर तैनाती का रिकार्ड

    लखनऊ। अभी तक आपने ‘एसपीजी प्रोटेक्शन’ वाले नेताओं के बारे में सुना होगा, लेकिन यूपी की नौकरशाही में अगर आप ‘एसपीजी प्रोटेक्शन’ प्राप्त अफसर नहीं हैं तो आप साइड लाइन यानी महत्वहीन पद पर में पड़े रहेंगे, चाहे आप कितने ही योग्य-काबिल और ईमानदार हों। पंचमतल पर तैनात एक सीनियर सर्टीफाइड ईमानदार आईएएस अफसर के नाम पर पड़ा ‘एसपीजी प्रोटेक्शन’ प्रदेश के आईएएस, आईपीएस, पीसीएस, पीपीएस अफसरों में खूब चर्चा का विषय बना हुआ है। एक से एक धाकड़ अफसरों का विभाग एक झटके में बदल गया, लेकिन लाख विवादों के बावजूद कुर्सी आंच तक नहीं आई।

    बताते चलें कि मायावती सरकार में कैबिनेट सचिव रहे दिवंगत शशांक शेखर सिंह का स्टाफ अफसर रहे यह वरिष्ठï आईएएस 2012 में अखिलेश सरकार की सत्ता में ताजपोशी के बाद केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए थे। 2017 में योगी सरकार बनने के बाद ही वापसी हो गई थी। बीते छह सालों से यह वरिष्ठ आईएएस अफसर कील-कांटा लेकर अपनी कुर्सी बचाने के लिए हर हथकंडे अपनाए हैं। इसी मॉडस अपरेंडी के कारण ‘एसपीजी प्रोटेक्शन’ का फार्मूला सफल है, जो भी अफसर इस प्रोटेक्शन कवर नहीं प्राप्त थे कुछ दिन पूर्व हुए तबादलों की आंधी में उड़ गए।

    एक वरिष्ठï आईएएस अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर आप बीते छह साल की इस वरिष्ठï आईएएस अफसर की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेंगे तो पाएंगे कि अपने आस-पास से लेकर जिलों तक ‘एसपीजी प्रोटेक्शन’ वाले अफसर ही तैनात किए गए हैं। तमाम सांसद, विधायक अपने करीबी अफसरों को जिलों में तैनाती के लिए भले कितने ही पत्राचार और सिफारिश करवाएं, जब तक ‘एसपीजी प्रोटेक्शन’ नहीं मिलता है तब तक तैनाती नहीं मिलती है। अगर बात विवादों की हो तो कई वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे और पूर्व राज्यपाल ने इस वरिष्ठï आईएएस अफसर के कारनामों की जांच के लिए सरकार को चि_ïी लिखी थी। लेकिन यह चि_ïी नक्कारखाने की तूती बन कर रह गई। सत्तापक्ष के कई विधायक और मंत्री भी इन महोदय अफसर की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर चुके हैं। लेकिन सभी ढाक-पांत के साबित हो रहे हैं।

    बीते चार-पांच सालों से महत्वहीन पदों पर तैनात कई अफसरों ने भी नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पीसीएस से आईएएस बने कई साल हो गए लेकिन विशेष सचिव सचिवालय से बाहर किसी जिले में तैनात नहीं किया जा रहा है। शासन में ऐसे अफसरों को कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा और सचिवालय में विशेष सचिव के पद पर तैनात किया गया है। ये वे अफसर हैं जो ‘एसपीजी प्रोटेक्शन’ प्राप्त नहीं है। प्रोटेक्शन प्राप्त अफसरों को महत्वपूर्ण पदों के साथ ही जिलों की कमान सौंपी जाती है। चाहे उस पर कितने ही दाग हों।

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