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लोकसेवक दंपति की बेटी को 10 करोड़ी कोठी के गिफ्ट पर ढेरों सवाल

नवम्बर 2021 में कोठी गिफ्ट हुई तो बेटी लोकसेवक दंपति की आश्रित थी या नहीं

  • नवम्बर 2021 में कोठी गिफ्ट हुई तो बेटी लोकसेवक दंपति की आश्रित थी या नहीं
  • लोकसेवक की सालाना आय से 20 फीसदी से अधिक की गिफ्ट नहीं लेने का नियम
  • रक्त संबंधों से इतर दिये गये गिफ्ट पर गिफ्ट स्टाम्प शुल्क देना अनिवार्य है

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक डीएस चौहान और केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय की सचिव श्रीमती राधा एस चौहान की पुत्री को नोएडा में 10 करोड़ की कोठी बतौर गिफ्ट मिलने पर सवाल उठ रहे हैं। एक, कीमती कोठी बेटी को गिफ्ट मिलने से पूर्व देश के शीर्ष लोक सेवक दम्पति ने क्या राज्य व केन्द्र सरकार से अनुमति प्राप्त की दो, नये नियमों के मुताबिक गिफ्ट की जानकारी आयकर विभाग को दी गयी। तीन, लोकसेवक सालाना आय के 20 फीसदी से अधिक का गिफ्ट नहीं ले सकता। डिपेन्डेंट बच्चों को इससे अधिक का गिफ्ट दिला नहीं सकता तो क्या जब इस दम्पत्ति बेटी को इतना बड़ा गिफ्ट मिला, उस समय वह उनकी डिपेन्डेंट नहीं थी। चार,अगर बेटी डिपेन्डेंट नहीं थी तो क्या दंम्पति ने सालाना जमा होने वाले सरकारी आयकर व अन्य दस्तावेजों में इसका उल्लेख किया था।

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ये सवाल नौकरशाही के गलियारों से लेकर जनता के बीच  उठ रहा है। जवाब भी तलाशा जा रहा है। सेवा, रक्षा के बदले कोई व्यक्ति रक्षक अथवा सेवक को गिफ्ट दे सकता है, इसमें कुछ नया नहीं है। परन्तु, गिफ्ट देने वाला व्यक्ति अगर रक्त संबंधों कानून में जो परिभाषित है से बाहर का है तो उसे गिफ्ट टैक्स जमा करना होता है। क्या इस मामले में ऐसा किया गया। लोकसेवक दंपत्ति की बेटी को कोठी गिफ्ट करने वाली श्रीमती अरुणा मोहन ने एक शपथ पत्र जारी किया है। नौ बिन्दुओं के इस शपथ पत्र में कोठी गिफ्ट करने के कारणों का उल्लेख किया है। लेकिन शपथ पत्र का एक बिन्दु रोधाभासी है। वह शपथ पूर्वक ये कहती आ रही हैं कि सेवा के बदले लड़की को उन्होंने मकान गिफ्ट किया है, लेकिन सातवें बिन्दु में वह कहती हैं कि कोठी गिफ्ट करने का ‘मोर रीजन’ (मुख्य कारण) कि मेरी पति राजेन्द्र मोहन (पूर्व आईपीएस) के निधन के बाद मेरे पति के परिजन इस कोठी पर कब्जा करने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। अब सच क्या है ? यह संबंधित पक्ष ही बता सकता है, इसमें आपत्ति भी नहीं। परन्तु जिन पर प्रदेश व देश की व्यवस्था संचालित करने का दायित्व रहा हो, उनके परिवार की बेटी को इतनी बड़ी राशि का मकान गिफ्ट में मिलने पर सवाल खड़े होते हैं।

इस संबंध में डीएस चौहान और राधा एस चौहान से बात करने का प्रयास किया गया, मगर वे उपलब्ध नहीं हुये। उनका पक्ष जानने के प्रयास में ही  ‘निष्पक्ष दिव्य संदेश‘ प्रत्येक साल केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय को दिये जाने वाले आयकर विवरणी को खंगाला, ताकि यह पता किया जा सके कि उन्होंने इस गिफ्ट का ब्यौरा दर्ज किया है या नहीं। इसमें यह खुलासा हुआ कि वर्ष 2018 के बाद डीओपीटी की साइट पर डीएस चौहान की आयकर विवरणिका उपलब्ध ही नहीं है। अलबत्ता राधा एस चौहान की आय का पूरा विवरण उपलब्ध है, जिसमें नोएडा से लेकर उत्तराखंड तक की संपत्तियों का उल्लेख है, मगर बेटी को मिले 10 करोड़ के मकान का जिक्र नहीं है। संभव है कि जब उनकी बेटी अमशुला चौहान को यह गिफ्ट मिला हो तब वह उनकी डिपेंन्डेट न रही हो, उनकी अपनी खुद की आय हो ?  समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामई का कहना है कि यूपी के अधिकारी निरंकुश हो गये हैं, उनके लिए कानून बेनामी है। वह मुख्यमंत्री के निर्देशों को भी तवज्जो नहीं देते हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अशोक सिंह सवाल उठाते हुये कहते हैं इस दौर में जब लोग किसी को सौ रुपये नहीं देते हैं तब 10 करोड़ की गिफ्ट पर सवाल तो उठेगा ही, वह कहते हैं इसमें कहीं न कहीं गड़बड़ी तो जरूर है।

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  शपथ पत्र ज्यों का त्यों, जो अरुणा मोहन ने जारी किया

  1. मैं, श्रीमती अरुणा मोहन पत्नी श्री राजेंद्र मोहन, उम्र _ व्यवसाय गृहिणी, निवासी मकान नंबर: 109, सेक्टर 15 ए, नोएडा यूपी, गंभीर प्रतिज्ञान पर बयान करती हूँ कि:
  2. मैं यह हलफनामा यह स्पष्ट करने के उद्देश्य से कर रही हूं कि मैंने पूरे होश और समझ के साथ मकान नंबर109 सेक्टर 15 ए नोएडा यूपी को सुश्री अम्शुला चौहान पुत्री डीएस चौहान को,उपहार विलेख में स्पष्ट रूप से बताए गए कारणों के लिए पंजीकृत उपहार विलेख द्वारा, उपहार में दिया है।
  3. यह देखा गया है कि कुछ पूरी तरह से असंबद्ध व्यक्ति ऐसे उपहार विलेख के बारे में विवादास्पद मुद्दे उठा रहे हैं,चाहे उनका कोई भी गलत मकसद हो ।मैं दृढ़तापूर्वक कहती हूँ कि उक्त उपहार विलेख बिना किसी छिपे उद्देश्य या वस्तु के एक वास्तविक हस्तांतरण है।
  4. सभी से यह ध्यान देने का अनुरोध है कि मेरे दिवंगत पति राजेंद्र मोहन (आईपीएस 1963) का करियर बहुत सफल और सराहनीय था। यह दिखाने के लिए पर्याप्त है कि मुझ पर कोई दबाव या जबरदस्ती नहीं की जा सकती। 4. मैं कहती हूं कि मैं और मेरे पति के (उनकी सेवानिवृत्ति के बाद से जब हम नोएडा में बस गए थे) निःसंतान दंपत्ति के रूप में, सुश्री अम्शुला के साथ गहरे भावनात्मक संबंध विकसित हुए, वह सिर्फ तीन साल की थी जब उनके पिता नोएडा में एसएसपी (1998) के रूप में तैनात थे। तब से हमने उसे बड़ा होते देखा है। तब से वह और उसका परिवार नोएडा में हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग रहे हैं। विशेष रूप से वह मेरे परिवार का हिस्सा बन गईं।5. सुश्री अम्शुला हमेशा मेरी देखभाल करती रहती हैं। कोविड के दौरान कुछ समय तक मेरे साथ रहीं और मेरी देखभाल की, जैसे कि वह मेरी पोती हों। मेरे और सुश्री अम्शुला के बीच गहरा भावनात्मक रिश्ता है। किसी को भी मेरे रिश्ते और उनके प्रति स्नेह पर कुटिल कोण डालने का अधिकार नहीं है।6. मेरी उम्र 81 साल है। मैं सुश्री अम्शुला को अपनी पोती की तरह मानती हूं। मेरा दृढ़ विश्वास है कि जब भी जरूरत होगी वह मेरी देखभाल के लिए मौजूद रहेंगी।7. मैं आगे कहती हूं कि मेरे जीवन काल में प्रियजन को ये उपहार देने का एक और मुख्य कारण है, वह यह कि मेरे दिवंगत पति के निधन के बाद उनके परिवार के सदस्यों ने लगातार घर हड़पने की कोशिश की और मैं एक बूढी निसंतान विधवा हूं इसी कारण से मुझे परेशान किया। 8. मैं, कहती हूं कि मैं 81 साल की हूं और एक सम्मानित अधिकारी की पत्नी हूं और मैं सभी संबंधित लोगों से अनुरोध करती हूं कि जीवन की इस उम्र में मेरे लिए विवाद पैदा न करें।9. मैं पुनः कहती हूं कि मुझे अपने दिवंगत पति की पेंशन के रूप में पर्याप्त वित्तीय जीविका मिलती है। मैं उसी घर में रहती हूं जो सुश्री अम्शुला को उनके प्यार और देखभाल के तहत उपहार में दिया गया। किसी को भी उन सच्चे और प्यार भरे रिश्तों में अनावश्यक  गंध महसूस नहीं करनी चाहिए जो तथाकथित खून के रिश्तों से कहीं अधिक शक्तिशाली और गहरे होते हैं।

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    इ-पेपर : Divya Sandesh

NDS Desk

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