Emmanuel Macron
पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने रविवार को राष्ट्रपति चुनाव में प्रतिद्वंद्वी विपक्षी नेता मैरिने ली पेन को हरा दिया। इस तरह 44 वर्षीय मैक्रों 20 वर्षो में दूसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने वाले फ्रांस के पहले राष्ट्रपति बन गए हैं। चुनाव में मैक्रों को 57 से 58 प्रतिशत मत मिले हैं। विपक्ष की उम्मीदवार ली पेन 42 से 43 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन ही जुटा पाई। मैक्रों की जीत के विरोध में पेरिस में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े।
चुनाव के आधिकारिक आंकड़े आने के पहले ही ली पेन ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। पेन ने कहा कि फ्रांस के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने मैक्रों के खिलाफ अन्य दलों से एकजुट होने का आह्वान किया है। (Emmanuel Macron) शुरुआती रुझानों के आते ही मैक्रों को जीत की बधाई देने वालों का तांता लग गया। यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट उर्सला वो डेर लेयन ने फ्रेंच में ट्वीट कर कहा कि हम एक साथ मिलकर फ्रांस और यूरोप को प्रगति के रास्ते पर आगे ले जाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमैनुएल मैक्रों को फ्रांस के राष्ट्रपति के रूप में फिर से चुने जाने पर बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा,”मैं भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखने के लिए उत्सुक हूं।”
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने मैक्रों को बधाई देते हुए कहा कि फ्रांस हमारा करीबी और बहुत महत्वपूर्ण सहयोगी है। हम आगे भी एक साथ काम करने को तैयार हैं। आधिकारिक तौर पर चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद मत प्रतिशत में कुछ अंतर हो सकता है। मतगणना का परिणाम दिखाने के लिए एफिल टावर के नीचे बड़ी स्क्रीन लगाई गई थी। जीत के बाद मैक्रों समर्थकों ने फ्रांस और यूरोपीय यूनियन के झंडे हाथ में लेकर जश्न मनाया। लोग मैक्रों के समर्थन में नारे लगा रहे थे।
परमाणु हथियार से संपन्न विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक फ्रांस के इस मतदान के परिणाम का यूक्रेन विवाद पर भी प्रभाव पड़ेगा। राष्ट्रपति पद पर फिर से चुने जाने के बाद मैक्रों के सामने पहली बड़ी चुनौती जून में होने वाला संसदीय चुनाव है। विपक्षी दल शीघ्र ही चुनाव प्रचार शुरू करने वाले हैं। (Emmanuel Macron) समाचार एजेंसी रायटर की रिपोर्ट के मुताबिक जीत के बाद मैक्रों समर्थकों ने फ्रांस और यूरोपीय यूनियन के झंडे हाथ में लेकर जश्न मनाया।लोग मैक्रों के समर्थन में नारे लगा रहे थे।
फ्रांस में इस चुनाव के लिए रविवार को शाम सात बजे तक मतदान के बाद मतगणना शुरू हुई। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों की मानें तो ये चुनावी नतीजे पूरे यूरोप के लिए बेहद मायने रखते हैं। समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक मैरीने ले पेन ने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में उनका अभूतपूर्व स्कोर स्वत: ही एक शानदार जीत दर्शाता है। हम जिन विचारों को मानते हैं वे शिखर पर पहुंच रहे हैं। मालूम हो कि मैरीने ली पेन फ्रांस के राष्ट्रपति पद की दौड़ में तीसरी बार उतरी हैं।
इस जीत के साथ ही इमैनुएल मैक्रों 20 वर्षों के दौरान दूसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने वाले फ्रांस के पहले राष्ट्रपति बन गए हैं। इस चुनाव में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को विपक्षी नेता मैरिने ली पेन से कड़ी चुनौती मिल रही थी। परमाणु हथियार से संपन्न और दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार फ्रांस भारत का मित्र देश है। इन चुनाव नतीजों का यूक्रेन विवाद पर असर पड़ेगा। अपने पहले कार्यकाल में इमैनुएल मैक्रों ने खुद को प्रमुख वैश्विक नेता के तौर पर स्थापित किया है।
मैक्रों को अपने पांच साल के कार्यकाल में कोरोना महामारी, बड़े विरोध प्रदर्शनों और यूक्रेन में रूसी हमले जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इन तमाम चुनौतियों के बीच मैक्रों ने फ्रांस की सियासत में युवा नौसिखिया की छवि से हटकर एक मजबूत नेता के रूप में खुद को स्थापित किया है। खासकर ऐसे नेता के तौर पर जो यूरोपीय संघ में महत्वपूर्ण निर्णय लेता हैं। मैक्रों ने यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के प्रयासों में भी जुड़े रहे हैं। मैक्रों ने तेजी से बदलते अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
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