उत्तर प्रदेश

Film Bandhu : ‘फिल्म बंधु’ को ले डूबेंगे संजय प्रसाद!

महाराष्ट्र से बड़ा यूपी में ‘फिल्म सिटी’ बनाने का योगी का ड्रीम प्रोजेक्ट खटाई में

  • Film Bandhu
  • घट रही है सब्सिडी फिल्मों की संख्या
  • खूब अड़ंगेबाजी हो रही है सब्सिडी की प्रक्रिया में
  • राजू श्रीवास्तव के निधन के बाद से ढाई साल से खाली है उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद के अध्यक्ष का पद

लखनऊ। आपने एक फिल्म ‘मदर इंडिया’ जरूर देखी होगी। इस फिल्म का एक किरदार सुक्खी लाला था। इस किरदार की सूदखोरी से पूरा गांव पीडि़त था। अब यही इतिहास फिल्म बंधु में दोहराया जा रहा है। फिल्म बंधु (Film Bandhu) के अध्यक्ष की टालू और गैरजिम्मेदार नीति ने यूपी में फिल्मों और फिल्म इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के  योगी सरकार भगीरथी के प्रयासों पर पानी फेर रहे हैं। इन आईएएस महोदय का अपने मामले में दिल रईस जैसा और दूसरों के मामले में सुक्खी लाला जैसा है। 12 जून 2025 को फिल्म बंधु की बैठक का जारी कार्यवृत्त फिल्म बंधु के अध्यक्ष की कार्य प्रणाली की पोल खोल रहा है। 2017 से 156 फिल्मों की पास पटकथा को फिर से परीक्षण कराए जाने का फरमान जारी किया है। जिन फिल्मों ने सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर फिल्म बंधु के अध्यक्ष सुक्खी लाला की तरह न खाता न बही सीधे सीधे 30 सब्सिडी की प्रतिशत की कटौती कर रहे हैं। साथ ही फिल्म बंधु द्वारा यूपी में फिल्म नीति के तहत फिल्मों को दी जाने वाली सब्सिडी साल दर साल कम हो रही है। इसका असर जहां यूपी में महाराष्ट्र से बड़ी फिल्मी सिटी बसाने के योगी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट पर पड़ रहा है वहीं फिल्म मेकरों का भी मोहभंग हो रहा है।

फिल्म बंधु में तैनात अधिकारियों का विवरण

पूर्ववर्ती सरकार में शुरू हुआ था फिल्मों को अनुदान

आपको बताते चलें कि यूपी में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पूर्ववर्ती सरकार ने फिल्म बंधु (Film Bandhu) नाम की वेबसाइट लॉन्च की थी। साथ ही फिल्म नीति 2015 का विमोचन भी किया है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक, पौराणिक, ऐतिहासिक विरासत तथा गौरवशाली परंपरा को देश-विदेश में प्रचारित-प्रसारित कर सकारात्मक छवि पेश करना था। इसके तहत फिल्म, निर्माण और अभिनय से जुड़े राज्य के कलाकारों और निर्माताओं को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करना था। यूपी के विभिन्न स्थलों पर फिल्म की शूटिंग करने पर पूर्ववर्ती सरकार नेे अनुदान दिए जाने का प्रावधान किया था। इसके तहत फिल्म शूटिंग के कुल दिनों में से कम से कम आधे दिन यूपी में शूटिंग करने पर अधिकतम एक करोड़ रुपये का अनुदान। फिल्म शूटिंग के कुल दिनों में से दो-तिहाई दिनों की शूटिंग करने पर अधिकतम दो करोड़ रुपये का अनुदान। अगर यूपी में ऐसी फिल्म की शूटिंग की जाती है, जिसमें सभी कलाकार राज्य के हों, तो उस फिल्म के कलाकारों को 50 लाख रुपये का अतिरिक्त अनुदान। ऐसी फिल्म जिसमें यूपी के पांच मुख्य कलाकार हों, तो उसके कलाकारों को 25 लाख रुपये का अतिरिक्त अनुदान। 2023 में योगी सरकार ने फिल्म नीति 2015 में संशोधन कर फिल्म नीति 2023 जारी किया।

सब्सिडी प्राप्त फिल्मों का विवरण

साल दर साल घट रही है फिल्मों को दी जाने वाली सब्सिडी फिल्म बंधु की वेबसाइट के रिकार्ड के मुताबिक 2017 से लेकर 2024 तक फिल्म बंधु ने अब तक कुल 257 फिल्मों को सब्सिडी दी गई है। जिसमें 2017 में 127 फिल्मों को सब्सिडी दी गई। 2018 में 12 फिल्मों को सब्सिडी दी गई। 2019 में 7 फिल्मों को सब्सिडी दी गई। 2021 में 42 फिल्मों को सब्सिडी दी गई। 2022 में 21 फिल्मों को सब्सिडी दी गई। 2023 में 2 फिल्मों को सब्सिडी दी गई। 2024 में 46 फिल्मों को सब्सिडी दी गई। फिल्म बन्धु की बैठक 12 जून 2025 को हुई थी।

12 जून 2025 की बैठक का कार्यवृत्त
12 जून 2025 की बैठक का कार्यवृत्त

बैठक के अनुसार कुल 51 फिल्मों को सब्सिडी देने का उल्लेख किया गया है। 51 में से चार फिल्मों को शून्य धनराशि दर्शायी गयी है। एक फिल्म का शून्य धनराशि होते हुए उसको पुर्नपरीक्षण के लिए आदेशित किया गया है, जबकि तीन फिल्मों को शून्य होते हुए भी पुर्नपरीक्षण हेतु नहीं किया गया है। बाकी 47 फिल्मों में से 15 हिन्दी फिल्में, 31 भोजपुरी फिल्में तथा एक बंगला फिल्म हैं। फिल्मों को घटती सब्सिडी की संख्या बता रही है कि फिल्म बंधु में तैनात पेशेवर अनुभवी अफसरों की नितांत कमी है। जिसका असर फिल्म बंधु की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है।

भारी भरकम पदों का दायित्वों से फिल्म बंधु का रिजल्ट फिसड्डी

फिल्म बंधु के चेयरमैन और फिल्म विकास परिषद के  अध्यक्ष पद पर प्रमुख सचिव संजय प्रसाद तैनात हैं। चूंकि संजय प्रसाद प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव सूचना और प्रमुख सचिव गृह जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनाती है। इतने भारी भरकम पदों का दायित्व रहने के कारण फिल्म बंधु और उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद के पदों के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं। 21 सितम्बर 2022 को मशहूर कमेडियन राजू श्रीवास्तव के निधन के बाद से किसी भी फिल्म कलाकार को उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद का अध्यक्ष नहीं बना पाए हैं। लगभग तीन साल बीत गए हैं। लेकिन सूचना विभाग में तैनात आला अफसरों की वजह से नई तैनाती नहीं हुई है। फिल्म बंधु के सूत्रों का कहना है कि फिल्म बंधु (Film Bandhu) में फिल्मों की सब्सिडी के लिए आवेदन से लेकर चयन प्रक्रिया में काफी रोड़े हैं। फिल्म बंधु के चेयरमैन फिल्मों को सब्सिडी देने में बहुत ही पेंच फंसाते हैं। पहले सब्सिडी के लिए आवेदन फीस 25 हजार थी अब बढक़र एक लाख रुपए हो गई है। सूचना विभाग के प्रमुख सचिव और फिल्म बंधु के अध्यक्ष संजय प्रसाद से प्रतिक्रिया लेने के लिए कई बार प्रयास किए गए। लेकिन कोई भी जवाब नहीं दिया।


यह भी पढ़े: UP Bureaucracy: आईएएस अफसरों ने बढ़ाया ‘विवादों का निवेश’!

इ-पेपर : Divya Sandesh

NDS Desk

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