लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी संस्था ‘इन्वेस्ट यूपी’ (Invest UP) एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह निवेश नहीं, बल्कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारियों को छुपाने और गोल-मोल जवाब देने का मामला है।
लखनऊ निवासी आरटीआई कार्यकर्ता श्री राजेन्द्र गौतम द्वारा विभाग में आउटसोर्सिंग, सेवानिवृत्त कर्मियों की दोबारा नियुक्ति और आरक्षण नियमों के पालन को लेकर मांगी गई जानकारियों पर जन सूचना अधिकारी (PIO) ने जो जवाब दिया है, वह पारदर्शिता के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आवेदक ने अपनी आरटीआई में मुख्य रूप से पांच बिंदु उठाए थे, जिनमें इन्वेस्ट यूपी में कार्यरत सेवानिवृत्त कर्मियों और आउटसोर्सिंग कर्मियों के नाम, पदनाम, नियुक्ति तिथि और उनके मानदेय भुगतान की प्रमाणित सूची मांगी गई थी। इसके अलावा वैश्विक कंसलटेंसी फर्म ‘अर्नेस्ट एंड यंग’ (EY) के साथ हुए करार के तहत आरक्षण के प्रावधानों और उसके तहत नियुक्त कर्मचारियों का विवरण भी मांगा गया था।
हैरानी की बात यह है कि जन सूचना अधिकारी श्री शान्तानन्द द्वारा दिनांक 19 जून, 2026 को जारी पत्र में मांगी गई प्रमाणित सूचियों को साफ तौर पर दबा दिया गया।
नामों की जगह सिर्फ संख्या: विभाग ने यह तो स्वीकार किया कि इन्वेस्ट यूपी में 11 सेवानिवृत्त कर्मी और 84 आउटसोर्सिंग कर्मी जैम (GeM) पोर्टल के माध्यम से कार्यरत हैं, लेकिन जब उनके नामों और प्रमाणित सूचियों की बात आई, तो उस पर पूरी तरह चुप्पी साध ली गई।
वेतनमान पर पर्दा: सेवानिवृत्त कर्मियों को दिए जा रहे भुगतान की सूची मांगने पर जवाब मिला कि इन्हें ‘मानदेय’ दिया जाता है न कि ‘वेतनमान’, और इसी तकनीकी बहाने के पीछे वास्तविक सूची को छुपा लिया गया।
आरक्षण के सवाल पर ‘जी हाँ’ लिखकर खानापूर्ति: सबसे गंभीर मामला आरक्षण के प्रावधानों से जुड़ा है। जब पूछा गया कि क्या नियुक्तियों में आरक्षण के नियमों का पालन किया गया है और उसकी प्रमाणित सूची दी जाए, तो विभाग ने केवल “जी है।” लिखकर पल्ला झाड़ लिया।
विभाग के इस रवैये से यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इन्वेस्ट यूपी कर्मचारियों के नाम और उनके मानदेय की प्रमाणित सूचियां सार्वजनिक करने से क्यों बच रहा है? क्या आउटसोर्सिंग और कंसलटेंसी फर्मों के माध्यम से होने वाली इन नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी की जा रही है, जिसे छुपाने के लिए आरटीआई के आवेदनों पर ऐसे अपूर्ण और भ्रामक जवाब दिए जा रहे हैं?
प्रथम अपील की तैयारी
जन सूचना अधिकारी के इस लचर और गैर-जिम्मेदाराना जवाब के खिलाफ आवेदक राजेन्द्र गौतम ने अब ‘इन्वेस्ट यूपी’ के प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील दर्ज कराने का फैसला किया है। आवेदक का कहना है कि यह सीधे तौर पर जनता के पैसे से चलने वाले विभाग में पारदर्शिता का हनन है और वे पूर्ण व प्रमाणित जानकारी हासिल करने के लिए राज्य सूचना आयोग तक की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
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