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power good : टोक्यो। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत एवं जापान के चतुष्कोणीय गठजोड़ क्वॉड की तीसरी शिखर बैठक में इन देशों के शीर्ष नेताओं ने स्वतंत्र एवं मुक्त हिन्द प्रशांत क्षेत्र के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी और क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा एवं समृद्धि के लिए रचनात्मक एजेंडे पर चलने का संकल्प व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर बिडेन, ऑस्ट्रेलिया के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री एंथनी एल्बानीस और जापान के प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा ने हिन्द प्रशांत क्षेत्र के घटनाक्रमों और समकालीन वैश्विक मुद्दों पर पर विचार विमर्श किया।
श्री मोदी ने अपने आरंभिक वक्तव्य में इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि बहुत कम समय में क्वॉड समूह ने विश्व पटल पर एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है। उन्होंने कहा, कि आज क्वाॅड का स्कोप व्यापक हो गया है और स्वरूप प्रभावी हो गया है। हमारा आपसी विश्वास, हमारा दृढ़ संकल्प, लोकतांत्रिक शक्तियों को नई ऊर्जा और उत्साह दे रहा है। क्वाॅड के स्तर पर हमारे आपसी सहयोग से एक स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी हिन्द-प्रशांत क्षेत्र को प्रोत्साहन मिल रहा है, जो हम सभी का साझा उद्देश्य है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी की विपरीत परिस्थितियों के वाबजूद, हमने वैक्सिन-डिलिवरी, जलवायु कार्रवाई, टिकाऊ एवं सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला, आपदा प्रबंधन और आर्थिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में आपसी समन्वय बढ़ाया है। इससे हिन्द प्रशांत में शांति, समृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने कहा कि क्वाॅड हिन्द प्रशांत क्षेत्र के लिए एक रचनात्मक एजेंडा लेकर चल रहा है। इससे क्वाॅड की छवि एक ‘अच्छाई की ताकत’ के रूप में और भी सुदृढ़ होती जायेगी।
चार देशों के इस अनौपचारिक एवं अस्थायी गठजोड़ क्वॉड का टोक्यो शिखर सम्मेलन इस गठजोड़ के नेताओं के बीच यह चौथा संवाद था। पहला संवाद मार्च 2021 में वर्चुअल माध्यम से, दूसरा प्रत्यक्ष रूप में सितंबर 2021 में वाशिंगटन में और तीसरा मार्च 2022 में वर्चुअल रूप से आयोजित किया गया था।
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलीवन के अनुसार बैठक में चारों नेताओं के क्वॉड की पहलों एवं कार्य समूहों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी, सहयोग के नये क्षेत्रों की पहचान की जाएगी और भविष्य में सहयोग के विज़न को लेकर रणनीतिक मार्गदर्शन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चूंकि क्वॉड के सभी सदस्य देश ताइवान की खाड़ी में शांति एवं स्थिरता के पक्षधर हैं इसलिए हिन्द प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुरक्षा संबंधी मुद्दे भी बैठक में उठेंगे।
बैठक में यूक्रेन के संदर्भ में संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता के सम्मान बरकरार रखने का मसला भी उठ सकता है जिस पर भारत हमेशा जोर देता आया है। लेकिन भारत एवं रूस के घनिष्ठ संबंधों को ध्यान में रखते हुए संयुक्त वक्तव्य में रूस का नाम लेकर सीधा आरोपित किये जाने की संभावना नहीं है। हालांकि हिंसा काे तुरंत बंद करने की मांग के साथ भारत ने यूक्रेन एवं रूस के बीच सैन्य संघर्ष को लेकर एक संतुलित रुख अपनाया है। संयुक्त वक्तव्य में दक्षिण चीन सागर में सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के बारे में भी कोई संकल्प आ सकता है।
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