लखनऊ। उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा में सवालों के बीच कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने छत्रपति शाहू जी महाराज (सीएसजेएमयू ) कानपुर विवि के कुलपति प्रो.विनय पाठक के खिलाफ जनवरी 2023 में शुरू कराई गयी जांच को बंद कर दिया है। कुलाधिपति की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि एक मनगढंत शिकायतों के आधार पर अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र ने जांच शुरू कराई थी, उन्होंने अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया था। कुलाधिपति के इस आदेश से एकेटायू में वह सभी जांचें स्वतः बंद हो गयीं जिस पर न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की जांच समिति कार्रवी की संस्तुति की थी।
अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय में नियुक्ति, ठेके, कारोबार, सिक्योरिटी एजेंसी के ठेके और कर्मचारियों की प्रोन्नित और कुलाधिपति के आदेश के बाद भी अनुसूचित जाति के एक कर्मचारी मनीष कुमार को सेवायोजित न किये जाने का विवाद कुलाधिपति, अदालत, आयोगों तक पहुंच गया है। तत्कालीन कुलपति प्रो. प्रदीप मिश्र ने इस अंतराल में परीक्षा नियंत्रक को हटाया, आईईटी की निदेशक प्रो.विनीत कंसल को उनके पद से हटाया और इन सबकी जांच के लिए कमेटियों का गठन किया गया। जनवरी 2023 में तत्कालीन कुलपति ने एकेटीयू के पूर्व कुलपति और मौजूदा समय में सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो.विनय पाठक के खिलाफ आई एक शिकायत पर न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया था। जिसने अपनी जांच रिपोर्ट में प्रो.विनय पाठक की कार्यशैली पर सवाल उठाये थे और ढेरों कंमियों की ओर इशारा किया था। एक दूसरी जांच में आईईटी के निदेशक प्रो.विनीत कंसल जिस पद पर मूल रूप से नियुक्त किये गये थे, उस नियुक्ति को ही नियम विरुद्ध पाया गया था। परन्तु जिसको लेकर अदालत में वाद चल रहा है, इस बीच कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने प्रो.विनीत कंसल को आईईटी के निदेशक पद पर पुनः नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया बल्कि यह भी कहा कि जिस कार्य परिषद ने विनीत कंसल को हटाया उसके कोरम पूरा नहीं था, यह पहला मौका था जब कुलाधिपति ने कार्य परिषद को अवैध ठहराया था।
इस बीच अब कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी डॉ.पंकज एल जानी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र ने पूर्व कुलपति प्रो.विनय पाठक के खिलाफ जो जांच का आदेश दिया है, वह नियमों के विपरीत है। एक फरवरी 2013 को उन्होंने जांच के जो आदेश दिये हैं, वह नियम विरुद्ध हैं, इसलिए उनके खिलाफ जांच बंद की जाती है। आदेश में कहा गया है कि जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की जांच कमेटी ने जो संस्तुतियां की हैं, उस कार्यवाही को समाप्त किया जाता है।
पूर्व कुलपति के खिलाफ जांच नहीं करा सकता
कुलाधिपति के आदेश में एकेटीयू की परिनियमावली का हवाला देते हुए कहा गया है कि 2.05 का हवाला देते हुए कहा गया है कि एकेटीयू का कुलपति स्वतः पूर्व कुलपति के खिलाफ कोई जांच नहीं करा सकता है। सिर्फ कुलाधिपति ही चाहे तो वह जांच करा सकता है, पर प्रदीप कुमार मिश्र ने अपने स्तर से जांच करा ली। जिससे इसे समाप्त किया जाता है।
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