UP Bureaucracy UP's IAS Officers Face a Moral Dilemma
UP Bureaucracy: लखनऊ। आपको जानकर हैरानी होगी कि यूपी को वन ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने के लिए यूपी के तमाम आईएएस अफसर धर्म संकट में हैं। यह धर्म संकट यूपी स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ की हस्तक्षेप की कार्यप्रणाली से पैदा हुआ है। पूर्व मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह को यूपी स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ के तौर पर यूपी के विकास के लिए नीतियां तैयार करना और सुझाव देने की जिम्मेदारी था। लेकिन वे विभागों के कार्यों और बड़े प्रोजेक्ट की योजनाओं की समीक्षा में हस्तक्षेप कर रहे हैं। विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठकों में बड़े प्रोजेक्ट पर हो रही लापरवाही के उजागर होने से पोल-पट्टी खुल रही है। इससे मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल और सीईओ मनोज कुमार सिंह के बीच अघोषित शीत युद्ध सतह पर आ गया है। इस शीत युद्ध में वे तमाम मातहत आईएएस अफसर फुटबॉल बने हैं, किसका आदेश मानें और किसका नहीं।
मनोज सिंह की वापसी से सीएस को झटका
आपको बताते चलें कि 31 जुलाई 2025 को यूपी के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह रिटायर हो गए थे। सेवा विस्तार के लिए जी-जान लगा दिया था। लेकिन सेवा विस्तार नहीं मिल पाया। इसके बाद तमाम प्रतिद्वंद्वी अफसरों को उम्मीद है कि अब मनोज कुमार सिंह की वापसी नहीं होगी। 16 नवम्बर 2025 को योगी सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह को राज्य परिवर्तन आयोग का सीईओ तीन वर्ष के लिए नियुक्त कर दिया। 17 नवंबर 2025 को राज्य परिवर्तन आयोग के सीईओ का पदभार ग्रहण कर लिया।
एक्शन में राज्य परिवर्तन आयोग के सीईओ
24 दिसंबर 2025 को राज्य परिवर्तन आयोग के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने एक कार्यालय ज्ञाप जारी किया। जिसमें कहा गया कि राज्य परिर्वतन आयोग को मुख्य कार्यों में विभागों के कार्यों व योजनाओं की समीक्षा का दायित्व है। बड़े प्रोजेक्ट और योजनाओं को समयबद्घ पूरा कराना है। भारत सरकार में प्रधानमंत्री के स्तर पर प्रत्येक माह बड़े प्रोजेक्टों की प्रगति की समीक्षा होती है। ठीक उसी तरह प्रत्येक माह के तीसरे सोमवार को मुख्यमंत्री द्वारा सीएम समीक्षा की जाएगी। बैठक में सभी संबंधित विभागों के आला अधिकारी वीसी के माध्यम से जुड़ेंगे। इस संबंध में 29 दिसंबर को बैठक आहूत की गई थी। यह बैठक इसलिए सफल नहीं हो पाई थी दावोस में हो रही बिजनेस मीटिंग में मुख्य सचिव और आईआईडीसी समेत तमाम आला अफसर शामिल होने के लिए जाना था।
इस मीटिंग में राज्य परिवर्तन आयोग के सीईओ मनोज कुमार सिंह भी दावोस गए थे। इस मीटिंग के असफल होने के बाद मनोज कुमार सिंह ने 19 जनवरी 2026 को एक बैठक आयोजित कराई।
उस बैठक का एजेंडा गंगा एक्सप्रेसवे निर्माण की प्रगति, मध्य गंगा नहर परियोजना, ऐरच सिंचाई परियोजना, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, ग्रेटर नोएडा लॉजिस्टिक पार्क, चिल्ला एलिवेटेड पुलाई ओवर और सीएम मॉडल कम्पोजिट स्कूलों के निर्माण की स्थिति तय किया गया था। यह बैठक भी सफल नहीं रही।
मुख्यमंत्री के सामने खुली आईएएस अफसरों की पोल
10 मार्च 2026 को सीएम समीक्षा बैठक काफी हाहाकारी रही। इस बैठक में राज्य परिवर्तन आयोग के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने तमाम विभागों की पोल खोलकर रख दी। इस बैठक में चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई 15.17 किमी है। इस परियोजना पर 1039.67 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। इस योजना के लिए 176 हेक्टेयर भूमि क्रय की जानी है। 158 हेक्टेयर खरीदी जा चुकी है। फरूर्खाबाद लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई 90.838 किमी है। परियोजना की लागत 7488.74 करोड़ रुपए है। इस परियोजना के लिए 1467 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। 76 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित हो पाई है। आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई 50.94 किमी है। इसकी परियोजना लागत 4775.84 करोड़ रुपए है। इस परियोजना के लिए 763 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। इसके लिए 1100 करोड़ रुपए जारी भी हो गए हैं। लेकिन अभी तक एक इंच जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पाया है। झांसी लिंक एक्सप्रेसवे 107 किमी लंबी है।
इस पर 7000 करोड़ रुपए खर्च होगा। इस योजना के लिए 1400 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। भूमि क्रय की धनराशि उपलब्ध कराने के लिए विभागीय मंत्री के फाइल लम्बित है। अभी तक इस योजना के लिए एक इंच जमीन की खरीद नहीं हो पाई है। जेवर लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई 74.30 किमी है। इसके लिए 980 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। भूमि क्रय के लिए 995 करोड़ रुपए भी उपलब्ध हैं। इसके बावजूद भी एक इंच जमीन की खरीद नहीं हो पाई है। मेरठ-हरिद्वार गंगाएक्सप्रेसवे की अनुमानित लंबाई 186 किमी है।
इसकी अनुमानित लागत 1161 करोड़ रुपए है। इस योजना को एनएचएआई और यूपीडा द्वारा पूरा किया जाएगा। इसके एलाइनमेंट की प्रक्रिया की फाइल शासन में लंबित है। विध्य एक्सप्रेसवे की अनुमानित लंबाई 277 किमी है। इस परियोजना की भी एलाइनमेंट की प्रक्रिया की फाइल शासन में लंबित है। विध्य एक्सप्रेसवे-पूर्वांचल लिंक का 107 किमी का निर्माण होना है। परियोजना की भी एलाइनमेंट की प्रक्रिया की फाइल शासन में लंबित है। गंगा एक्सप्रेसवे का काम फरवरी माह तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया था। अभी पूर्ण नहीं हुआ है। सीएम समीक्षा बैठक में इन परियोजनाओं की खामियां प्रकाश में आई हैं। मुख्यमंत्री ने अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है।
तेज हुई जवाबी कार्रवाई
नौकरशाही के सूत्रों का कहना है कि इस बैठक के बाद से राज्य परिवर्तन आयोग के सीईओ मनोज कुमार सिंह और मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल और अन्य संबंधित विभागों के आला अफसरों के शीत युद्घ तेज हो गया। पोल पट्टïी खोल अभियान का यह असर हुआ कि राज्य परिवर्तन आयोग के सीईओ के अधिकार और दायित्व याद दिलाया कि आपकी ड्यूटी केवल सुझाव और नीतियां बनाने तक हैं।
योजना भवन में राज्य परिवर्तन आयोग का भव्य ऑफिस बनना था। यह फाइल लटक गई है। राज्य परिवर्तन आयोग के सीर्ईओ कई विदेश यात्राएं करनी थी, वे वित्त विभाग में परामर्श के लिए भेज दी गई। इसके साथ ही अप्रत्यक्ष संदेश से राज्य परिवर्तन आयोग के सीईओ की बैठकों में बड़े अफसर किनारा करने लगे। इस घमासान के कारण औद्योगिक एवं अवस्थापना विकास विभाग काफी असहज है। क्योंकि काफी योजनाएं कछुवा चाल से चल रही हैं।
दो-दो सीएस हैं एक्टिव, एक प्रत्यक्ष दूसरा अप्रत्यक्ष
नाम न छापने की शर्त पर औद्योगिक एवं अवस्थापना विभाग के एक आईएएस अफसर ने बताया कि यूपी में दो मुख्य सचिव काम कर रहे हैं। एक प्रत्यक्ष तौर पर दूसरे अप्रत्यक्ष तौर पर। मातहत अफसरों के सामने बड़ा संकट है कि किसका आदेश मानें और किसकी मीटिंग में जाएँ। इस मामले में अधिकतर आईएएस अफसर मुख्य सचिव एस.पी. गोयल के साथ हैं। उनके आदेशों का पालन कर रहे हैं। चूंकि मुख्य सचिव महोदय हार्ट अटैक के बाद से अपने स्वास्थ्य पर पूरा फोकस कर रखा है।
वे न तो ज्यादा किसी से मिलते हैं और न ही बहुत मीटिंग करते हैं। लेकिन राज्य परिवर्तन आयोग के सीईओ की तेजी मुख्य सचिव को काफी अखर रही है। इसी वजह से कई मुद्दों पर तगड़ा शीतयुद्ध है। इस मुद्दे पर राज्य परिवर्तन आयोग के सीईओ मनोज कुमार सिंह और मुख्य सचिव एस.पी. गोयल से कई बार संपर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।
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इ-पेपर: Divya Sandesh
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