उत्तर प्रदेश

UP IAS: सेवा विस्तार ने लगाया तेजतर्रार IAS अफसरों के कैरियर पर ग्रहण!

केन्द्र की चली तो अरुण सिंघल होंगे, यूपी की चली तो मनोज सिंह होंगे सीएस

राजेंद्र के. गौतम

UP IAS: लखनऊ। केन्द्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर ढाई साल से सेवा विस्तार पर रहे यूपी के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र का कार्यकाल 30 जून को पूरा हो जाएगा। इस पद पर तैनाती के लिए दावेदार अफसर दिल्ली से लेकर यूपी तक लॉबिंग में जुटे हैं। सत्ता के गलियारों में चर्चाएं तेज है कि इस बार मुख्य सचिव की तैनाती में यूपी के मुख्यमंत्री की चलती है या फिर केन्द्र सरकार की। उम्मीद है कि इस बार नए मुख्य सचिव की तैनाती में मुख्यमंत्री के पसंदीदा अफसर पर मुहर लगेगी।

उल्लेखनीय है कि रिटायरमेंट के एक दिन पहले यानी 31 दिसंबर 2021 को 1984 बैच के वरिष्ठ आईएएस (UPIAS) दुर्गा शंकर मिश्र को सेवा विस्तार देते हुए यूपी का मुख्य सचिव बनाया था। इसके बाद फिर एक साल का सेवा विस्तार हुआ। 2024 के लोकसभा चुनाव से पूर्व फिर छह माह का सेवा विस्तार हुआ, जोकि 30 जून 2024 को समाप्त हो रहा है।

मुख्य सचिव के रेस में हैं ये अफसर

आईआईडीसी एवं कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज सिंह

केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात मुख्य सचिव पद की रेस में 1987 बैच के वरिष्ठ आईएएस अरूण सिंघल हैं। इनका कार्यकाल अप्रैल 2025 में खत्म हो रहा है। 1987 बैच की वरिष्ठ आईएएस लीना नंदन का नाम भी चर्चा में है। लेकिन इनका कार्यकाल दिसंबर 2024 में समाप्त हो रहा है। 1988 बैच के आईएएस रजनीश दुबे अगस्त 24 में रिटायर हो रहे हैं। औद्योगिक विकास आयुक्त और कृषि उत्पादन आयुक्त के पद पर तैनात 1988 बैच के वरिष्ठ आईएएस मनोज सिंह का कार्यकाल जुलाई 2025 है। मौजूद समय प्रबल दावेदार हैं। केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति में सचिव डीओपीटी में तैनात 1988 बैच के वरिष्ठ आईएएस राधा एस. चौहान का कार्यकाल जून 2024 में पूरा हो रहा है। मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव पद पर तैनात 1989 बैच के वरिष्ठ आईएएस एस.पी. गोयल का कार्यकाल 2027 में पूरा होगा। नियुक्ति एवं कार्मिक व कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव देवेश चतुर्वेदी का रिटायरमेंट फरवरी 2026 में हैं। वरिष्ठ आईएएस मोनिका एस. गर्ग का कार्यकाल अप्रैल 2025 में पूरा हो रहा है। 1990 बैच के अपर मुख्य सचिव राज्यपाल के पद पर तैनात डा. सुधीर एम. बोबडे का कार्यकाल दिसंबर 2025 में पूरा होगा।

सत्ता के गलियारों में चर्चा के मुताबिक मुख्य सचिव पद के लिए तीन अफसरों में ही जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है। अगर केन्द्र सरकार की मर्जी चलती है तो 1987 बैच के वरिष्ठ आईएएस अरूण सिंघल को मुख्य सचिव के पद पर ताजपोशी की जा सकती है। अगर यूपी के मुख्यमंत्री की मर्जी को तरजीह मिलती है तो औद्योगिक विकास आयुक्त और कृषि उत्पादन आयुक्त के पद पर तैनात 1988 बैच के वरिष्ठ आईएएस मनोज सिंह को यूपी का मुख्य सचिव बनाया जा सकता है। अगर यह होता है कि मुख्य सचिव के पद पर लगभग 22 साल बाद क्षत्रिय वर्ग के व्यक्ति को मौका मिलता है। 2003 में यूपी के मु य सचिव के पद पर दिवंगत अखण्ड प्रताप सिंह तैनात रहे हैं।

इन अफसरों को मिल सकती है अहम तैनाती

कई वरिष्ठ आईएएस अफसरों का कहना है कि यूपी की नौकरशाही में बड़ा बदलाव होगा। अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री के पद पर तैनात एस.पी. गोयल केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाएंगे। यूपी सरकार ने एनओसी दे दी है। केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति में गृह विभाग के सचिव बनाए जा सकते हैं। इस तरह अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक देवेश चतुर्वेदी केन्द्र सरकार में डीओपीटी में सचिव की नियुक्ति मिल सकती है। अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री के पद पर गृह और वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाल रहे वरिष्ठ आईएएस दीपक कुमार को तैनाती मिल सकती है। गृह विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात रहे संजय प्रसाद के पास प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री और सूचना की जि मेदारी है। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर हटाए गए संजय प्रसाद को गृह विभाग वापसी का इंतजार है। चर्चाएं यह भी है कि सूचना में नए अफसर को तैनाती मिल सकती है। नमामि गंगे में तैनात वरिष्ठ आईएएस अनुराग श्रीवास्तव को भी पंचम तल पर तैनाती मिल सकती है। नौकरशाही में इस बात की भी काफी चर्चा है कि अपर मुख्य सचिव के पद पर तैनात एस.पी. गोयल केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना चाहते हैं। लेकिन मुख्य सचिव पद के लिए भी अपने दिल्ली के आकाओं से पैरवी में जुटे हैं।

सेवा विस्तार के कारण ये अफसर नहीं बन पाए मुख्य सचिव

1984 बैच के वरिष्ठ आईएएस दुर्गा शंकर मिश्र को मिले 30 माह के सेवा विस्तार की वजह से प्रबल दावेदारों में कई वरिष्ठ आईएएस अफसर संजय अग्रवाल, आलोक टण्डन, आलोक सिन्हा, अरुण सिंघल, अवनीश कुमार अवस्थी, महेश गुप्ता, रेणुका कुमार, संजीव मित्तल, रजनीश दुबे, डा. नवनीत कुमार सहगल मुख्य सचिव नहीं बन पाए।

रंगबाज अफसरों पर गिरेगी गाज

लोकसभा के चुनाव में सत्तारूढ़ दल को मिली करारी हार की वजह से अहम पदों पर तैनात अफसर चार जून के बाद से अपनी कुर्सी बचाने के लिए तिकड़म में जुट गए हैं। चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग के निर्देश पर हटाए गए पूर्व प्रमुख सचिव गृह की गैरजि मेदाराना हरकतों और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा भी भाजपा को भारी पड़ी। इसके साथ ही अपने अधीनस्थ अफसरों और जनता के साथ रंगबाजी भरा रवैया भी काफी हद तक जि मेदार है। सरकार को जनता से दूर करने में माहिर अफसरों के कामों की समीक्षा शुरू हो गई है।


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