उत्तर प्रदेश

BSP Rally: 14 वर्ष के वनवास के बाद ‘महारैली’ से बसपा दिखाएगी ताकत

बीएसपी की सक्रियता से सचेत हुए गैरबसपाई दल

  • BSP Rally
  • बसपा सुप्रीमो मायावती और चाणक्य सतीश चंद्र मिश्र ने रैली को सफल बनाने के लिए झोंकी ताकत
  • रैली में 20 लाख की भीड़ जुटने की संभावना

राजेन्द्र के. गौतम

लखनऊ। 14 साल बाद बहुजन समाज पार्टी फिर से अपनी खोई राजनीतिक ताकत पाने के लिए बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम जी के पुण्य तिथि (9 अक्टूबर 2025) के अवसर पर राजधानी लखनऊ के रमाबाई मैदान में एक विशाल रैली का आयोजन करने जा रही है। इस रैली में 403 विधान सभाओं में से लगभग 10 लाख से अधिक समर्थकों के जुटने की उम्मीद है। बहुजन समाज पार्टी और बसपा के चाणक्य इस रैली को सफल बनाने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती की सक्रियता से विपक्षी दल इस रैली को लेकर निगाहें जमाए हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर बसपा दमदारी से चुनावी मैदान में उतरती है तो सत्तारूढ़ पार्टी समेत अन्य दलों के लिए बड़ी चुनौती साबित होगी।

बसपा की रैलियों का इतिहास

उल्लेखनीय है कि 2007 में यूपी में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद से बसपा तेजी से कमजोर हुई। आज हालात यह है कि यूपी विधान सभा में मात्र एक विधायक ही जिता है। जबकि लोकसभा 2024 के चुनाव में बसपा का एक भी सांसद नहीं जिता पाया। बीते 19 साल में बसपा राजनीतिक तौर पर अर्श से फर्श पर पहुंच गई। बसपा की अंतिम राष्टï्रीय विशाल महारैली मान्यवर कांशीराम जी के जन्मदिन और बसपा के 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर 15 मार्च 2010 को रमाबाई मैदान में हुई थी। इस महारैली में लगभग 20 लाख बसपाई शामिल हुए थे।

इससे पहले 14 अप्रैल 1984 को बसपा अपनी पार्टी के गठन के बाद 22 से 24 जून 1984 को दिल्ली के लाल किला मैदान में प्रथम राष्टï्रीय अधिवेशन किया था। 14 जनवरी 1990 को दयानिधान पार्क में  एक विशाल आरक्षण समर्थक रैली का आयोजन किया था। बसपा का प्रथम महिला विशाल सम्मेलन ग्वालियर में 24 मई 1992 में हुआ था। 10 जुलाई 1994 को लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में दल-बदल विरोधी महारैली की थी। 16 दिसम्बर 1995 को लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में  समाजवादी पार्टी के खिलाफ सावधान महारैली की थी। 4 जनवरी 1998 को मुम्बई में शिवाजी पार्क में विशाल रैली की थी। 20 सितम्बर 1998 को भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ बेगम हजरत गंज में एक विशाल रैली की थी। 15 दिसम्बर 2001 को लक्ष्मण मेला मैदान में बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम जी ने एक विशाल रैली में सुश्री मायावती को बसपा का उत्तराधिकारी घोषित किया था। 20 जनवरी 2002 में पंजाब के लुधियाना में हाहाकार रैली की थी। 28 सितम्बर 2002 को बसपा ने अम्बेडकर मैदान में सपा के खिलाफ निंदा और धिक्कार महारैली की थी। 13 मार्च 2004 को अम्बेडकर मैदान में पर्दाफाश रैली का आयोजन किया था। 9 जून 2005 को अम्बेडकर मैदान में ब्राह्मïण सम्मेलन रैली का आयोजन किया था। 1 मार्च 2007 को रमाबाई मैदान में सत्ता प्राप्त प्राप्त करो संकल्प महारैली का आयोजन किया था। 9 अगस्त 2008 को रमाबाई मैदान में सावधान रहो, आगे बढ़ो नाम से एक विशाल रैली का आयोजन किया था। 15 मार्च 2010 को मान्यवर कांशीराम जी के जन्मदिन और बसपा के 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक राष्टï्रीय विशाल महारैली का आयोजन किया था। 9 अक्टूबर 2012 को रमाबाई मैदान में महासंकल्प रैली की थी।

BSP Rally: रैली का सफल बनाने के लिए कोर टीम का हुआ गठन

बसपा सूत्रों का कहना है कि फर्श पर पड़ी बसपा में जान फूंकने के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती ने मान्यवर कांशीराम जी के पुण्य तिथि पर होने वाली विशाल रैली के लिए पूरा मैनेजमेंट कर रही हैं। बसपा के राष्टï्रीय महासचिव और बसपा चाणक्य सतीश चंद्र मिश्र को रैली सफल बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। बामसेफ और बीवीएफ को लगाने के साथ ही बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल, पूर्व सांसद घनश्याम चंद्र खरवार, मुख्य मण्डल प्रभारी, सूरज सिंह जाटव, पूर्व सांसद मुनकाद अली, पूर्व सांसद गिरीश चंद्र जाटव, पूर्व एमएलसी नौशाद अली, मुख्य मण्डल प्रभारी अखिलेश अम्बेडकर, मुख्य मण्डल प्रभारी सुनील कुमार, मुख्य मण्डल प्रभारी राकेश कुमार गौतम और जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार गौतम को लखनऊ में रैली को सफल बनाने के लिए टीम में शामिल किया गया है।

14 साल बाद बसपा फिर से अपने राजनीतिक जमीन को वापस पाने के लिए मैदान में वापसी से गैरबसपाई दल हैरत में हैं। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार योगेश श्रीवास्तव कहते हैं कि 2012 से लगातार विधान सभा और लोकसभा के चुनाव में बसपा का प्रदर्शन गिर रहा है। यह महसूस हो रहा था कि बसपा ने संघर्ष का रास्ता छोड़ दिया है। 2012 से पहले बसपा हर साल कोई न कोई विशाल रैली करती थी। बहुत दिनों बाद अब बसपा जमीन पर दिख रही है। अगर रैली सफल होती है। वैसे उम्मीद है कि रैली सफल होगी। क्योंकि बसपा ही एकलौती ऐसी पार्टी है जो रमाबाई मैदान को विशाल जनसैलाब से भर पाती है। बसपा की सक्रियता से भाजपा, सपा और कांग्रेस की निगाहें 9 अक्टूबर को होने वाली विशाल रैली की सफलता पर लगी हैं। अगर रैली सफल होती है तो बसपा 2027 के विधान सभा के चुनाव में बड़ा उलटफेर कर सकती है।

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NDS Desk

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