Byju's को अमेरिकी अदालत से बड़ा झटका लगा है। कंपनी को 53.3 करोड़ डॉलर फ्रीज करने का आदेश दिया गया है।
Byju’s : भारत की जानी-मानी एडटेक कंपनी Byju’s पहले से ही कई वित्तीय परेशानियों का सामना कर रही है, और अब उसकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। एक अमेरिकी अदालत ने Byju’s की पैरेंट कंपनी Think & Learn के 53.3 करोड़ डॉलर फ्रीज कर दिए हैं। यह फैसला उन कर्जदाताओं के लिए एक बड़ी जीत है जो Byju’s के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। कर्जदाताओं की मांग थी कि इस पैसे का इस्तेमाल सिर्फ उन्हें भुगतान करने के लिए किया जाना चाहिए।
पैसा गायब?
Think & Learn पर यह आरोप है कि उसने कानूनी विवादों से बचने के लिए इस 53.3 करोड़ डॉलर को कथित तौर पर Morton’s Hedge Fund में ट्रांसफर कर दिया था। इसके बाद इस रकम को एक अज्ञात ऑफशोर ट्रस्ट में भेज दिया गया था। कर्जदाताओं ने चिंता जताई थी कि Byju’s इस पैसे का इस्तेमाल कर सकती है, इसलिए उन्होंने इसे कोर्ट में जमा करवाने की मांग की थी।
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Byju’s के फाउंडर पर सवाल
अदालत ने Byju’s के फाउंडर Byju Raveendran के भाई और कंपनी के डायरेक्टर Riju Ravindran को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि पैसा कहां है। जज ने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि कंपनी को नहीं पता कि पैसा कहां है। उन्होंने पूछा कि Think & Learn उन्हें यह जानकारी क्यों नहीं दे रही है कि पैसा कहां है।
Raveendran के वकील Sharon Corpus ने करते हुए कहा कि Think & Learn में चल रहे वित्तीय संकट के लिए कर्जदाता ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं जो कंपनी पर लोन चुकाने के लिए अत्यधिक दबाव बना रहे थे।
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Byju’s की कानूनी लड़ाई
Byju’s फिलहाल डेलावेयर और न्यूयॉर्क की अदालतों में कर्जदाताओं से कानूनी लड़ाई लड़ रही है। इससे पहले, कर्जदाताओं ने Think & Learn द्वारा बनाई गई होल्डिंग कंपनी Alpha का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था। Alpha को 1.2 अरब डॉलर का कर्ज जारी करने के लिए बनाया गया था। Byju’s Alpha ने अदालत में दिवालिया होने की याचिका दायर कर दी थी।
रविंद्रन ने डेलावेयर कोर्ट में कंपनी को जब्त करने के आदेश के खिलाफ अपील दायर की है। गौरतलब है कि इससे पहले अदालत ने फ्लोरिडा हेज फंड के फाउंडर को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया था कि Think & Learn ने पैसा कहां छिपाया है। उन्हें अदालत को पैसा रखने की जगह की जानकारी देने में देरी करने के लिए हर दिन 10 हजार डॉलर का जुर्माना भी भरना पड़ रहा है।
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इ-पेपर : Divya Sandesh
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