Lucknow Metro:लखनऊ, के शहरी परिदृश्य में एक और महत्वपूर्ण विकास होने जा रहा है! लखनऊ मेट्रो का दूसरा फेज जल्द ही शुरू होने वाला है, जो शहर के पूर्वी से पश्चिमी हिस्से को जोड़ेगा. यह नया ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर चारबाग से बसंतकुंज तक मेट्रो कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिससे लाखों निवासियों को सीधा फायदा मिलेगा.
परियोजना का संक्षिप्त विवरण
यह बहुप्रतीक्षित कॉरिडोर 11.165 किलोमीटर लंबा होगा और इसके निर्माण पर लगभग 5801 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च आएगा. परियोजना में कुल 12 मेट्रो स्टेशन शामिल होंगे, जिनमें से 7 स्टेशन भूमिगत होंगे और 5 एलिवेटेड होंगे.
भूमिगत स्टेशन:
चारबाग
गौतम बुद्ध मार्ग (लाटूश)
अमीनाबाद
पांडेयगंज
सिटी स्टेशन
मेडिकल कॉलेज चौराहा
चौक
एलिवेटेड स्टेशन:
ठाकुरगंज
बालागंज
सरफराजगंज
मूसाबाग
बसंतकुंज
अनूठी विशेषताएं और शहर के लिए लाभ
इस कॉरिडोर की सबसे खास बात यह है कि चारबाग से बसंतकुंज तक मेट्रो जमीन से कम से कम सौ फुट नीचे से गुजरेगी. यह इंजीनियरिंग का एक जटिल कार्य है, जो शहर की मौजूदा भूमिगत सीवर लाइनों, पानी की पाइपलाइनों और नालों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है. भूमिगत स्टेशनों और ट्रैक के निर्माण के दौरान किसी भी बाधा से बचने के लिए मेट्रो इंजीनियर्स और नगर निगम की टीमें जल्द ही संयुक्त सर्वेक्षण शुरू करेंगी.
चारबाग मेट्रो स्टेशन एक महत्वपूर्ण इंटरचेंज स्टेशन के रूप में उभरेगा. इसका मतलब है कि यात्री यहां से मौजूदा रूट और नए ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के बीच आसानी से मेट्रो बदल सकेंगे, जिससे पूरे शहर में आवागमन बेहद सुविधाजनक हो जाएगा.
यह नया कॉरिडोर शहर के सबसे घनी आबादी वाले और व्यापारिक केंद्रों जैसे अमीनाबाद, चौक और ठाकुरगंज को सीधे मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेगा. फिलहाल बसंतकुंज तक सार्वजनिक परिवहन के सीमित साधन हैं, लेकिन मेट्रो के आने से इस क्षेत्र की एक बड़ी आबादी को आवागमन में सुविधा मिलेगी, जिससे उनका समय बचेगा और यात्रा अधिक आरामदायक होगी.
परियोजना की वर्तमान स्थिति और आगे का रास्ता
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वित्तीय मंजूरी 21 मई को मिल चुकी है. पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है. अब केवल केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी का इंतजार है, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा. इस कॉरिडोर की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को मार्च 2024 में उत्तर प्रदेश सरकार से और पिछले साल जुलाई में नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप से भी मंजूरी मिल चुकी है.
एक बार केंद्रीय कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद, निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है और इसके चार से पांच साल में पूरा होने की संभावना है. लखनऊ मेट्रो का यह दूसरा चरण शहर के परिवहन ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा, जिससे यह और भी अधिक आधुनिक और सुविधाजनक बन जाएगा. शहरवासी इस नए मेट्रो विस्तार का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो उनके दैनिक जीवन को बहुत आसान बना देगा.
लखनऊ मेट्रो के इस नए विस्तार को लेकर आपके क्या विचार हैं? हमें टिप्पणियों में बताएं!
Lucknow Metro
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