Mi Builders
Mi Builders : लखनऊ। व्यापारी से अवैध तरीके से हड़पी गई जमीन पर एमआई सेंट्रल पार्क के नाम से बनाए जा रहे फ्लैटों पर कब चलेगा बाबा का बुलडोजर पीड़ित के अलावा लोगों की नजर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के निर्णय पर लगी है स गत माह इसी मामले की जांच एसीएस अरविंद कुमार द्वारा भी की गयी है। Mi Builders कम्पनी के मालिक कादिर अली और उनके पुत्र कासिम अली की काली करतूत उजागर होने के बावजूद बीजेपी सरकार का शातिर भू.माफिया के प्रति नरमी जन चर्चा का विषय बनी हुई है। जबकि पीड़ित न्याय पाने के लिए दर दर की ठोकरें खऱहे हैं। पीड़ित धन प्रकाश बुद्धराजा द्वारा अब तक विभिन्न विभागों में गयी शिकायत सच पायी गयी है।
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सबसे पहले सरोजनी नगर तहसील ने बिल्डर्स के खिलाफ अपनी रिपोर्ट दी, फिर रेरा ने फ्लैटों की बिक्री पर रोक लगाते हुए बिल्डर्स कम्पनी को नोटिस जारी कर वैध कागजातों के 15 दिवस के अंदर पेश होने का आदेश दिया था। बिल्डर्स ने जवाब देने के बजाय शो कॉज नोटिस को ही स्टे कराकर अपने काले कारनामे जारी रखा है। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने भी पीडि़त बुद्धराजा की शिकायत को सही पाया और अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दिया है। जबकि गलत तरीके से मानचित्र पास करके लखनऊ विकास प्राधिकरण पहले ही फंस चुका है, इसके बावजूद अपने पूर्व अफसरों को बचाने के लिए प्राधिकरण के अफसर पूरे मामले पर लीपापोती कर रहे हैं।
पीडि़त बुद्धराजा कई बार सीएम योगी आदित्य नाथ से मिलकर न्याय गुहार लगा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने भी न्याय विभाग से जांच सौंप कर रिपोर्ट मांगी थी, प्रकरण की निष्पक्ष जांच करके न्याय विभाग ने रिपोर्ट शासन को भेज दी है। न्याय विभाग की रिपोर्ट भी कादिर अली और उनके शातिर साथियों को कठघरे में खड़ा कर सकती है। मजेदार बात यह है कि सभी रिपोर्ट शातिर और बाहुबली बिल्डर्स कम्पनी के मालिक के खिलाफ ह, यही नहीं लवी अग्रवाल उर्फ कबीर लवी, सैयद कादिर अली और कासिम अली के खिलाफ इसी मामले में गोसाईं गंज थाना में गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है। विवेचना अधिकारी द्वारा चार्जशीट कोर्ट में दाखिल भी किया जा चुका है।
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विदित हो कि पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार में नेताओं,भूमाफियाओं और अधिकारियों के गठजोड़ और उनके जाल में फंसे धन प्रकाश बुधराजा को भाजपा की अगुवाई वाली योगी सरकार के दूसरी कार्यकाल में भी न्याय नहीं मिल सका। पूरे पांच के कार्यकाल बीत जाने के बाद भी न्याय नहीं मिल सका है। पूर्व में अखिलेश यादाव की अगुवाई वाली सपा सरकार में ठगी की शिकार हुये पीडि़त व्यापारी बुधराजा आज भी न्याय की आस में दर-दर की ठोकरें खा रहे है। मामला सूबे के किसी दूरदराज इलाके का नहीं बल्कि राजधानी लखनऊ स्थित अर्जुन गंज के सरसावां का है। यहां नाक नीचे फर्जीवाड़ा और जालसाजी करके पूरी जमीन हथिया ली गई। शिकायत के बावजूद शासन और प्रशासन के कान नें जूं नही रेंग रहा। जो जन चर्चा का विषय बना हुआ है, शातिर बिल्डर कादिर अली और उसका निदेशक बेटा कासिम अली पूर्ववर्ती सपा सरकार में पूरी घटना को अंजाम दिया।
सपा में ऊंची पहुंच रखने वाले कादिर अली का भाजपा की योगी सरकार में भी दबदबा कायम है। यदि ऐसा नहीं होता तो पीडि़त व्यापारी धन प्रकाश बुधराजा को अब तक जरुर न्याय मिल जाता क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए यह बात जगजाहिर है कि वह हमेशा न्याय के पक्ष में ही खड़े दिखायी देते हैं। यह भी कहा जा रहा पीडि़त बुधराजा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कईबार मिलकर न्याय की गुहार लगा चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी ने पीड़ित को न्याय का भरोसा दिया है। प्रकरण में मुख्यमंत्री योगी ने पीडि़त को न्याय दिलाने का प्रयास भी किया। लेकिन करीबी अधिकारियों ने प्रकरण को ऐसा गोल-गोल घुमाया कि कोई भी चक्कर खाकर गिर जाये, कारण Mi Builders के इस खेल में कई बडे नामी अफसर और नेता का शामिल हैं। यह कह पाना कठिन है कि जो कादिर अली के साथ मिले हुए अफसर अपनी रकम बचाने में लगे हैं या कादिर अली को। सभी जानते हैं कि सेंटर पार्क के प्रोजेक्ट में कई बड़े अफसर और नेताओं की काली कमाई लगी है।
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दरअसल एमआई बिल्डर्स प्राईवेट लिमिटेड कंपनी के प्रबंध निदेशक सैय्यद कादिर अली ने वेश कीमती जमीन के स्वामी राजधानी के मदन मोहन मालवीय मार्ग निवासी धनप्रकाश बुद्धराजा से साम,दाम,दण्ड,भेद सारे दांव लगाकर उनकी सुल्तानपुर रोड पर स्थित अर्जुनगंज के सरसावां में 31737 वर्ग मीटर में से 6000 वर्ग मीटर भूमि का बिल्डर एग्रीमेंट कराया था उसके बाद कादिर अली ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) एवं उप्र आवास विकास परिषद में अपनी पहुंच और धनबल का प्रयोग करते हुए 31737 वर्गमी की भूमि न सिर्फ हथिया ली बल्कि उस पर आसानी से वर्ष 2015 में नक्शा भी पास करा लिया, दिलचस्प तथ्य यह है कि नक्शा आवास विकास परिषद को पास करना था लेकिन पूर्व में शासन सत्ता के प्रभाव और एलडीए के अफसरों की मिलीभगत से एलडीए नें ही नक्शा भी पास कर दिया और बाद में वर्ष 2017 में आवास विकास परिषद से अनापत्ति प्रमाण पत्र ले लिया था लेकिन मजे की बात यह है कि एलडीए ने अनापत्ति मिलने से 16 महीने पहले ही नक्शा पास कर दिया था। इतना ही नहीं जब कथित बिल्डर एग्रीमेंट पर स्टाम्प शुल्क भी मात्र 6000 वर्ग मीटर का दिया गया है। तब भी एलडीए ने अज्ञात आधार पर 31737 वर्गमी यानी पूरी जमीन पर नक्शा पास कर दिया। पीडि़त बुद्धराजा ने एलडीए और आवास विकास विभाग में सैकड़ों बार जा-जाकर यह शिकायत दर्ज करायी कि जो कुछ हो रहा है वह अनैतिक और नियम विरुद्ध है लेकिन पहले के अफसरों को बचाने के लिये वर्तमान ने अफसर मौन हैं। यहां तक कि भू-सम्पदा विनि
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