उत्तर प्रदेश

UP Bureaucracy: अयोध्या की नगरी की सफाई व्यवस्था में ‘विशाल ‘चूना’!

स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग की ऑडिट रिपोर्ट ने खोली पोल

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  • स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग की ऑडिट रिपोर्ट ने खोली पोल
  • अपर नगर आयुक्त ने बताया कि 25 आपत्तियाँ निस्तारित हुई हैं, 62 अवशेष हैं।
  • सूचना निदेशक ने विशाल सिंह ने कहा कि मैंने नौकरी चोरी के पैसे के लिए नहीं किया, बल्कि पिता के बताए आदर्शों पर चलने और सेवा के लिए किया है।

राजेन्द्र के. गौतम

लखनऊ। योगी सरकार के भरोसेमंद आईएएस अधिकारी विशाल सिंह पर प्रसिद्घ कवि काका हाथरसी पर यह कविता ‘मन मैला तन ऊजरा, भाषण लच्छेदार, ऊपर सत्याचार है भीतर भ्रष्टाचार’ सटीक साबित होती है। पूर्व अयोध्या नगर आयुक्त कार्यकाल से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं ने एक बार फिर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निधि लेखा परीक्षा की ऑडिट रिपोर्ट में सफाई व्यवस्था समेत विभिन्न मदों में करोड़ों रुपये के भुगतान में गड़बडिय़ों का खुलासा से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि सरकार की छवि भी गहरा प्रभाव पड़ा है। सब कुछ साफ रखने की कला में माहिर विशाल सिंह के नगर आयुक्त अयोध्या में तैनाती के दौरान सफाई व्यवस्था और अन्य कार्यों में किए गए करोड़ों रुपए के ‘सफाई कारनामों’ की पोल स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग की ऑडिट रिपोर्ट ने खोल दी थी। ऑडिट रिपोर्ट इंगित करती है कि चाहे सफाई व्यवस्था का कार्य हो या फिर किसी भी भुगतान कार्य में करोड़ों रुपए की खूब वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। सबसे खास बात यह है कि योगी सरकार की उपलब्धियों और लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ाने के लिए आए सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के निदेशक के सफाई कारनामें जहां यूपी की नौकरशाही में चर्चा का विषय बने हुए हैं वहीं इन जैसे अफसरों के कारनामों से योगी सरकार की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्वच्छता अभियान में अनियमितताओं का खेल

आपको बताते चलें कि राम की नगरी अयोध्या में पूर्व नगर आयुक्त के पद पर तैनाती के दौरान विशाल सिंह के प्रयासों से स्वच्छता रैंकिंग में लंबी छलांग लगाते हुए अयोध्या नगर निगम क्षेत्र पूर्ण रूप से खुले में शौंच मुक्त करने अयोध्या नगर निगम को क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया ने ओडीएफ प्लस-प्लस की रैंकिंग हासिल हुई थी। लेकिन पूर्व नगर आयुक्त की इस उपलब्धि पर स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग की 12 सितम्बर 2025 को नगर निगम लेखा वर्ष 2023-24 की 70 पेज की ऑडिट रिपोर्ट ने पानी फेर दिया था। ऑडिट में दावा गया था कि स्वच्छता कार्यक्रम में करोड़ों रुपए की अनियमितताएं की गई थीं। यह ऑडिट 10 जून 2024 से लेकर 29 मार्च 2025 को समाप्त हुई थी। इस दौरान महापौर के पद पर गिरीश पति त्रिपाठी, नगर आयुक्त के पद पर विशाल सिंह और संतोष कुमार शर्मा और वित्त एवं लेखाधिकारी के पद पर नरेन्द्र प्रताप सिंह तैनात थे।

यह भी पढ़ें: UP Bureaucracy: ‘विशाल’ के ‘विशाल कारनामें’!

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि बगैर आवश्यकता के पम्पों के संचालन और पैनल की 81 पम्पों की खरीद सर्वेश बिल्डर और एक्यूमेक से 1,01, 26,177 रुपए की हुई थी। 17,11,000 का राज्यानुदान का दुरूपयोग हुआ है। 19,89,56,785 रुपए चेक/NEFT और ऑनलाइन जमा किए गए। चार्टेड एकाउंटेंट ने 81,97,914 रुपए की धनराशि प्राप्त न होने की दशा में व्यय पक्ष में जोड़ी गई थी। कर विभाग द्वारा बोगस जमा दर्शाया गया है। ऑडिट रिपोर्ट में इस प्रकरण को उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की संस्तुति की है। अग्रिम धनराशियों का समायोजन न कराए जाने से 2,187,157 रुपए की क्षति पहुंचाई गई है।

नगर निगम अयोध्या का दावा

इस संबंध में नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार से संपर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई। लेकिन अपर नगर आयुक्त नरेन्द्र नाथ ने बताया कि स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के ऑडिट  की आपत्तियों का जवाब भेजा गया था। जिसमें से 25 निस्तारित हो गई है। बाकी बची 62 आपत्तियों की क्वेरी का जवाब भेज दिया गया है। लेकिन अनियमितताओं के सवाल को टाल गए।

विवादों का पिटारा

शासन के सूत्रों का कहना है कि अयोध्या के नगर निगम में ऑडिट रिपोर्ट ने प्रमोटी आईएएस विशाल सिंह की कार्यप्रणाली की पोल खोल कर रख दी है। इससे पूर्व वाराणसी कॉरीडोर और भदोही की तैनाती के दौरान हुए कई खेलों की शिकायतें शासन तक पहुंची, लेकिन शासन ने गम्भीरता से नहीं लिया। भगवान राम की नगरी अयोध्या में सफाई कार्य में हुए अनियमितताओं से सरकार के साफ दामन पर छींटे पड़ गए हैं। सूत्रों का कहना है कि योगी सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विभाग सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की कमान संभाले लगभग एक साल होने के करीब हैं। इसके बावजूद न तो मीडिया संस्थानों से और न ही पत्रकारों से बेहतर तालमेल बिठा पाए हैं। अधिकतर मीडिया संस्थान सूचना निदेशक की पहुंच से बाहर हो गए हैं। इसको लेकर मीडिया संस्थानों में काफी नाराजगी है। लघु और मध्यम अखबार बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं।

इस मुद्दे पर सम्पर्क किए जाने पर प्रमोटी आईएएस और सूचना निदेशक ने विशाल सिंह ने कहा कि मैंने अपनी 26 साल की सेवा में पूरी ईमानदारी और निष्ठा से देश और प्रदेश की सेवा की है। मैंने नौकरी चोरी के पैसे के लिए नहीं किया, बल्कि पिता के बताए आदर्शों पर चलने और सेवा के लिए किया है। अपर मुख्य सचिव सूचना संजय प्रसाद और मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल से सम्पर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।

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