उत्तर प्रदेश

UP Bureaucracy: ‘विशाल’ के ‘विशाल कारनामें’!

2025 में माँ और भाई ने दान की करोड़ों की सम्पत्ति

  • UP Bureaucracy:
  • सरकार और मीडिया के बीच सेतु बनने में नाकाम साबित हुए हैं सूचना निदेशक
  • अप्रत्यक्ष तौर पर प्राइवेट व्यक्ति संभाल रहा है सूचना निदेशक का कार्यभार

राजेन्द्र के. गौतम

लखनऊ। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के निदेशक और आईएएस विशाल सिंह अपने नाम की तरह ही ‘विशाल धन-सम्पदा’ के अकूत मालिक है। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को प्रत्यक्ष तौर उपलब्ध कराई गई चल-अचल सम्पत्ति के विवरण से पता चलता है। इसके साथ ही प्रत्यक्ष तौर पर वाराणसी के सबसे चर्चित संत अतुलानंद रेजीडेंशियल एकेडमी के मेंटर भी हैं। श्रीमान सूचना निदेशक विशाल सिंह का दिल भी काफी विशाल है। यही वजह है कि सोशल मीडिया और पीआर एजेंसी के चयन में टेंडर घटाने और बढ़ाने का खूब खेल हुआ। बीते एक साल के कार्यकाल में सूचना निदेशक के तौर पर जहां लिए गए कई निर्णय विवादों के दायरे में रहे वहीं सरकार और मीडिया के बीच सेतु बनाने में नाकाम रहे हैं। अब इनके कारनामें शासन से लेकर सत्ता के गलियारों में तैर रहे हैं। (UP Bureaucracy)

संत अतुलानंद कालेज के मेंटर हैं प्रमोटी आईएएस विशाल सिंह

SANT ATULANAND ACADEMY’S Mentor Vishal Singh

आपको बताते चलें कि 2015 बैच के प्रमोटी आईएएस विशाल सिंह बनारस के प्रतिष्ठिïत और प्रभावशाील परिवार से हैं। जिनके बड़े-बड़े संत अतुलानंद के नाम से कई ‘विशाल कॉलेज’ हैं। वे इस कॉलेज के मेंटर हैं। इनके करियर पर नजर डालें तो हमेशा प्राइम पोस्टों पर ही तैनात रहे हैं। पीसीएस रहते हुए विशाल सिंह ने लखनऊ, बुलंदशहर, कासगंज, बिजनौर, वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या में कई अहम पदों की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। विशाल सिंह की काबिलियत एवं कार्यक्षमता को देखते हुए वर्ष 2021 में पीसीएस से आईएएस कैडर में प्रमोशन दिया गया। आईएएस बनने के बाद विशाल सिंह को अयोध्या नगर निगम के नगर आयुक्त और अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का कार्यभार सौंपा गया। इसके बाद 21 अप्रैल 2024 को सूचना विभाग के निदेशक पद पर तैनात किए गए। ये महोदय जहां-जहां भी तैनात रहे हैं, वहां-वहां के कई फैसले विवादों में रहे हैं। (UP Bureaucracy)

अकूत धन-सम्पदा के मालिक

वर्ष 2023 में डीओपीटी को अपनी चल-अचल सम्पत्ति का विवरण देते    हुए प्रमोटी आईएएस विशाल सिंह ने बताया कि नोएडा के 77 सेक्टर में अरविन्द गृह प्रवेश अपार्टमेंट में फ्लैट 202 नम्बर को वर्ष 2016 में 6310000 रुपए में खरीदा था। वाराणसी के वरूणा गार्डेंस अपार्टमेंट में फ्लैट नम्बर 401 को वर्ष 2018 में भी 6310000 रुपए में खरीदा था। वाराणसी के ही होलापुर शिवपुरी में 55335000 रुपए की पैतृक जमीन है। जौनपुर के कुहींकला चांदपुर कुही खुर्द में 14700000 करोड़ रुपए की पैतृक जमीन मिली है। वाराणसी के गिलट बाजार में 15750000 करोड़ रुपए की पैतृक जमीन मिली है।

माँ और भाई ने खूब दिया दान


2025 में डीओपीटी के रिकार्ड के मुताबिक मौजा, होलापुर, परगना शिवपुर, तहसील सदर वाराणसी मां विद्या सिंह और भाई राहुल सिंह ने 1479100 लाख रुपए मूल्य की जमीन विशाल सिंह को गिफ्ट की गई। मौजा, होलापुर, परगना शिवपुर, तहसील सदर वाराणसी में मां विद्या सिंह ने अपने पुत्र विशाल सिंह को 982000 लाख रुपए मूल्य की आवासीय जमीन दान की थी।

मौजा, होलापुर, परगना शिवपुर, तहसील सदर वाराणसी में मां विद्या सिंह ने अपने पुत्र विशाल सिंह को 1430000 लाख रुपए मूल्य की आवासीय जमीन     दान की थी। वर्ष 2014 में वरिष्ठ आईएएस विशाल सिंह को मां और भाई से खूब दान में करोड़ों रुपए की जमीन मिली। पिछले वर्ष की तरह ही 2026 में भी डीओपीटी ने अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण दिया है। इस वर्ष चल-अचल संपत्ति में कोई ग्रोथ नहीं हुई। वाराणसी सूत्रों का कहना है कि संत अतुलानंद ट्रस्ट के माध्यम से संत अतुलानंद रेजीडेंसियल एकेडमी कालेज का संचालन किया जा रहा है। इस कॉलेज के मेंटर भी विशाल सिंह हैं। इस कॉलेज के बारे में कोई जानकारी डीओपीटी को नहीं दी गई है।

सरकार और मीडिया के बीच में सेतु बनने में नाकाम रहे सूचना निदेशक

शासन के सूत्रों का कहना है कि आईएएस विशाल सिंह को 21 अप्रैल 2024 को सूचना विभाग के निदेशक पद पर तैनात किया गया था। अगले अप्रैल माह एक साल पूरे हो जाएंगे। लेकिन एक साल के कार्यकाल में सरकार और मीडिया के बीच सेतु बन पाने में नाकाम साबित हुए हैं। इसकी अहम वजह यह है कि प्रभावशाली और अकूत धन सम्पदा के मालिक होने मन और मस्तिष्क पर घमण्ड का गहरा प्रभाव है। इसकी वजह से न तो किसी पत्रकार का या अखबार के रिपोर्टर का फोन नहीं उठाते हैं और न ही मिलते हैं। यही हाल शासन के आला अफसरों के साथ भी है। अपर मुख्य सचिव सूचना संजय प्रसाद से भी कोई तालमेल नहीं है। सिर्फ बड़े-बड़े अखबारों और मीडिया संस्थानों व चैनलों के मालिकों से संबंध तालमेल रखते हैं। इस वजह से बीते एक साल के अंदर योगी सरकार की राष्टï्रीय स्तर पर टीआरपी बहुत ही प्रभावित हुई है। सूचना निदेशक की नाकामी के कारण अधिकतर अखबार, चैनल, सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सरकार विरोधी खबरों की भरमार बढ़ गई है।   सूचना निदेशक की कार्यप्रणाली को लेकर मीडिया संस्थानों में काफी रोष है। जबकि यह चुनावी वर्ष है।

चर्चा में है सूचना निदेशक का प्राइवेट ओएसडी!

सूचना विभाग के सूत्रों का कहना है कि जब से सूचना निदेशक के पद पर तैनात होकर विशाल सिंह आए हैं तब से अपने साथ एक प्राइवेट व्यक्ति विनीत पाठक को ओएसडी बनाकर लाए हैं। प्रमोटी आईएएस जहां-जहां तैनात रहे हैं, वहां-वहां यह व्यक्ति साए की तरह साथ रहा है। सूचना विभाग के इतिहास में यह पहली बार है कि कोई सूचना निदेशक प्राइवेट व्यक्ति को अपना ओएसडी बनाया है। यह व्यक्ति अप्रत्यक्ष तौर पर सूचना निदेशक का कार्यभार देख रहा है। सूचना निदेशक महोदय का इस व्यक्ति पर संरक्षण देखना है तो आज नोएडा में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में एक विभागाध्यक्ष के तौर पर शामिल हुआ। कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री के सिंगापुर और जापान यात्रा के दौरान यह व्यक्ति सूचना निदेशक के प्रतिनिधि के तौर पर यात्रा की थी। जबकि यह व्यक्ति सरकारी नहीं प्राइवेट है। मेहरबानी यहीं नहीं रूकती है उसे सरकारी आवास और एक एजेंसी से गाड़ी भी उपलब्ध कराई गई है। पहले यह व्यक्ति सूचना भवन और लोकभवन में काफी सक्रिय था। अगर कोई डीलिंग करनी है तो  यह व्यक्ति माध्यम बनता है। (UP Bureaucracy)

लेकिन मामला तूल पकडऩे के बाद यह व्यक्ति पीडब्यूडी के बगल की एक प्राइवेट बिल्डिंग में पीआर एजेंसी वैल्यू 360 डिग्री के ऑफिस में बैठता है। सूचना निदेशक महोदय भी अब सूचना विभाग या फिर लोकभवन में ज्यादा समय बिताने के बजाए पीआर एजेंसी वैल्यू 360 डिग्री के ऑफिस में बिताते हैं। सरकार के लिए सोशल मीडिया या फिर मुख्यमंत्री की पीआर एजेंसी के चयन का मामला हो। तीन-तीन बार टेण्डर निरस्त होते हैं। जब अधिक धनराशि को लेकर सवाल उठते हैं, तो टेंडर कैंसिल कर देते हैं। फिर भी पिछले वित्त वर्ष के सापेक्ष कई गुना अधिक करोड़ों धनरशि पर सोशल मीडिया और पीआर एजेंसी का चयन होता है। सूचना निदेशक के ओएसडी विनीत पाठक से सम्पर्क करने पर कहा कि वे कुछ नहीं कह सकते हैं, अगर बात करनी है तो सूचना निदेशक से बात करें। लेकिन वे इस बात का जवाब नहीं दिया कि वे गैरसरकारी व्यक्ति होते हुए भी प्रदेश और केन्द्र सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में किस हैसियत से शामिल होते हैं। (UP Bureaucracy)

सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के निदेशक विशाल सिंह से कई बार प्रतिक्रिया लेने के प्रयास में सम्पर्क किया गया। लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। अपर मुख्य सचिव सूचना संजय प्रसाद से कई बार संपर्क साधा गया। लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।

(UP Bureaucracy)

यह भी पढ़ें: UP Bureaucracy: एमओयू के मायाजाल में उलझा इन्वेस्ट यूपी!

इ-पेपर: Divya Sandesh

NDS Desk

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