UP Bureaucracy: Invest UP Entangled in the Web of MOUs
लखनऊ। औद्योगिक एवं अवस्थापना विकास विभाग के कुछ वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मुख्यमंत्री की नजरों में अपनी साख मजबूत करने के लिए संदिग्ध कंपनियों से जल्दबाजी में एमओयू करने के आरोप लग रहे हैं। बीते एक साल में बड़े निवेश के दावों के साथ किए गए कई समझौते अब सवालों के घेरे में हैं। व्यूनाउ मार्केटिंग सर्विसेज लिमिटेड, सैन फ्रांसिस्को स्थित ऑस्टिन यूनिवर्सिटी और पुच एआई जैसी संस्थाओं के साथ हुए एमओयू की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों ने सरकार की छवि को प्रभावित किया है।
व्यूनाउ मार्केटिंग सर्विसेज लिमिटेड : निवेश के नाम पर बड़ा खेल
व्यूनाउ मार्केटिंग सर्विसेज लिमिटेड से जुड़ा मामला सबसे पहले चर्चा में आया। कंपनी के साथ यूपी के सभी 75 जिलों में 750 डेटा सेंटर स्थापित करने का करार किया गया था। इस घोषणा के बाद कंपनी के शेयरों में तेजी आई और निवेशकों से करीब 3,558 करोड़ रुपये जुटाए गए। हालांकि बाद में यह मामला तब और गंभीर हो गया जब इस कथित घोटाले के मास्टरमाइंड सुखविंदर सिंह खरौर और उनकी पत्नी डिंपल खरौर को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। जालंधर कोर्ट ने दोनों को जांच के लिए ईडी की कस्टडी में भेज दिया। गौरतलब है कि नवंबर 2022 में व्यूनाउ इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड और यूपी सरकार के बीच 13,500 करोड़ रुपये (करीब 1.6 बिलियन डॉलर) का एमओयू साइन हुआ था। 21 नवंबर 2022 को कंपनी के एमडी सुखविंदर सिंह खरौर और तत्कालीन आईआईडीसी अरविंद कुमार ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। अब सवाल उठ रहे हैं कि जिस कंपनी के साथ इतना बड़ा करार हुआ, उसका लाइसेंस बाद में रद्द हो चुका था।
ऑस्टिन यूनिवर्सिटी : नॉलेज सिटी पर उठे सवाल
दूसरा विवाद सैन फ्रांसिस्को की ऑस्टिन यूनिवर्सिटी के साथ हुए एमओयू को लेकर है। यूपी सरकार ने 5,000 एकड़ में नॉलेज स्मार्ट सिटी विकसित करने के लिए करीब 35,000 करोड़ रुपये के निवेश का दावा किया था। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया कि जिस यूनिवर्सिटी का जिक्र किया गया, वहां एक भी छात्र नामांकित नहीं है। बाद में सरकार की ओर से सफाई दी गई कि समझौता ऑस्टिन यूनिवर्सिटी नहीं, बल्कि ऑस्टिन कंसल्टिंग ग्रुप के साथ हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार संबंधित संस्थान सीमित संसाधनों के साथ संचालित होता है और इसमें फैकल्टी की संख्या भी बेहद कम है। इतना ही नहीं, अमेरिका की संबंधित नियामक संस्था द्वारा उसका लाइसेंस भी रद्द किए जाने की बात सामने आई है। यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड के मुताबिक 2016 से 2020 के बीच एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया।
पुच एआई : 25 हजार करोड़ के एमओयू पर विवाद
तीसरा मामला पुच एआई नाम के एक स्टार्टअप से जुड़ा है। दावा किया गया कि इस कंपनी के साथ 25,000 करोड़ रुपये का एमओयू किया गया है, जिससे उत्तर प्रदेश को एआई हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया गया। हालांकि इस कंपनी के ट्रैक रिकॉर्ड और वित्तीय स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठे। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी शुरुआती चरण में है और उसका वार्षिक राजस्व करीब 50 लाख रुपये बताया गया। ऐसे में इतनी बड़ी परियोजना को संभालने की उसकी क्षमता पर सवाल खड़े हुए।
मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह मुद्दा और चर्चा में आया, जहां यूजर्स और टेक एक्सपर्ट्स ने इस डील की पारदर्शिता और प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बढ़ते विवाद के बाद मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना पड़ा कि यह प्रत्यक्ष निवेश नहीं, बल्कि एक प्रारंभिक समझौता (एमओयू) है।
आईएएस अफसरों की कार्यशैली पर सवाल
सूत्रों का कहना है कि विभाग के कुछ अधिकारी निवेश आकर्षित करने के नाम पर बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के लिए एमओयू कर रहे हैं। इससे सरकार की छवि पर बुरा असर पड़ रहा है। यह स्थिति तब है जब औद्योगिक निवेश के लिए विशेषज्ञ कंसल्टेंसी सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
इसके बावजूद कंपनियों की विश्वसनीयता और वित्तीय स्थिति का समुचित आकलन नहीं किया जा रहा है। इस पूरे मामले पर अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग आयुक्त दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास आलोक कुमार और इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरन आनंद से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
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इ-पेपर: Divya Sandesh
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