राजेन्द्र के. गौतम
लखनऊ। कभी द्रुत गति से दौड़ता उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) अब कछुवा चाल से दौड़ रहा है। चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, लखनऊ, आगरा-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, मेरठ-हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे का विस्तार, विध्य एक्सप्रेसवे, विध्य एक्सप्रेसवे-पूर्वांचल लिंक के निर्माण और गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य कछुवा चाल से चल रहा है। सीएम समीक्षा बैठक में यह तथ्य प्रकाश में आए हैं। यह स्थिति तब है जबकि यूपी के मुख्यमंत्री यूपीडा की कार्यप्रणाली पर बारीक ढंग से नजर रखने के लिए आईएएस अफसरों की भारी-भरकम टीम को लगा रखा है।
इस परियोजना के लिए 763 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। इसके लिए 1100 करोड़ रुपए जारी भी हो गए हैं। लेकिन अभी तक एक इंच जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पाया है। झांसी लिंक एक्सप्रेसवे 107 किमी लम्बी है। इस पर 7000 करोड़ रुपए खर्च होगा। इस योजना के लिए 1400 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। भूमि क्रय की धनराशि उपलब्ध कराने के लिए विभागीय मंत्री के फाइल लम्बित है। अभी तक इस योजना के लिए एक इंच जमीन की खरीद नहीं हो पाई है। जेवर लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई 74.30 किमी है। इसके लिए 980 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। भूमि क्रय के लिए 995 करोड़ रुपए भी उपलब्ध है। इसके बावजूद भी एक इंच जमीन की खरीद नहीं हो पाई है। मेरठ-हरिद्वार गंगाएक्सप्रेसवे अनुमानित लम्बर 186 किमी है। इसकी अनुमानित लागत 1161 करोड़ रुपए है। इस योजना को एनएचएआई और यूपीडा द्वारा पूरा किया जाएगा। इसके एलाइनमेंट की प्रक्रिया की फाइल शासन में लंबित है। विध्य एक्सप्रेसवे की अनुमानित लम्बाई 277 किमी है।
इस परियोजना की भी एलाइनमेंट की प्रक्रिया की फाइल शासन में लंबित है। विध्य एक्सप्रेसवे-पूर्वांचल लिंक का 107 किमी का निर्माण होना है। इस परियोजना की भी एलाइनमेंट की प्रक्रिया की फाइल शासन में लंबित है। गंगा एक्सप्रेसवे का काम फरवरी माह तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया था। अभी पूर्ण नहीं हुआ है। सीएम समीक्षा बैठक में इन परियोजनाओं की खामियां प्रकाश में आई हैं। मुख्यमंत्री ने अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है। यूपीडा में आईएएस अफसरों की भारी भरकम टीम मौजूद है। यूपीडा में मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल की अहम भूमिका है। यूपीडा के आईआईडीसी और सीईओ दीपक कुमार हैं। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पद आईएएस श्रीहरि प्रताप शाही और आईएएस शशांक चौधरी तैनात हैं।
यूपीडा के सूत्रों का सीईओ के पास कई विभागों का चार्ज है। इस वजह से पूरी तरह से न्याय नहीं हो पा रहा है। यूपीडा अपनी वेबसाइट पर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के समय पर पूर्ण होने की उपलब्धि के पर में अंकित कर रखा है। उस समय इसके सीईओ डॉ. नवनीत कुमार सहगल थे। जिन्होंने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे समय पर निर्माण करवाया था। इसी तरह पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य डा. अवनीश कुमार अवस्थी के कार्यकाल में हुआ था। इन अफसरों के बाद यूपीडा की चाल कछुवा की तरह हो गई है। इस संबंध में यूपीडा के सीईओ दीपक कुमार और एसीओ श्रीहरि प्रताप शाही से सम्पर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।
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