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UP Bureaucracy: घपलेबाज के दाग धुलने में लगे हैं पंधारी यादव!

भ्रष्टाचार के चक्रव्यूह में 9 साल से उलझी है जांच

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  • भ्रष्टाचार के चक्रव्यूह में 9 साल से उलझी है जांच
  • बदलते रहे 5 जांच अधिकारी

राजेन्द्र के. गौतम

लखनऊ। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस वाली सरकार में साजातीय के भ्रष्टाचार के दाग को खत्म करने का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीएसटी) में खेल शुरू हो गया है। सीएसटी में हुई अवैध नियुक्तियों के मुख्य किरदार अनिल यादव पर प्रमुख सचिव महोदय पंधारी यादव काफी मेहरबान हैं। तभी तो अपने खास दागी सेवादार को पहले तकनीकी सलाहकार समिति का सदस्य बनाया और अब दाग खत्म करवाने के लिए जांच अधिकारी के साथ ही घपले से संबंधित अभिलेखों को प्रस्तुत करने वाले प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बदल दिया है। जिससे खास दागी सेवादार को क्लीनचिट मिल सके।

अटकी है सीएसटी में हुई अवैध नियुक्तियां की जांच

आपको बताते चलें कि (सीएसटी) में नियुक्तियों पर रोक के बावजूद नियमों और अर्हता को ताक पर रखकर अवैध नियुक्तियां हुईं थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन अवैध नियुक्तियों की जांच के लिए केन्द्र सरकार से लेकर प्रदेश सरकार तक खूब शिकायतें हुईं। लेकिन 2017 से लेकर 2025 तक हुई शिकायतों पर जांच के आदेशों को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि अखिलेश यादव सरकार में हुई नियुक्तियों के घोटाले को कोई अदृश्य ताकत दबाने की पूरी कोशिश कर रही है। यही वजह है कि जहां तीन-तीन दिग्गज पूर्व आईएएस अफसरों को इस मामले की जांच सौंपी गई थी आज तक पूरी नहीं हुई वहीं वर्तमान समय में कई आईएएस अफसर इस नियुक्ति घोटाले की जांच को दबाने में लगे हुए हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री के आदेशों को दरकिनार कर जिम्मेदार अफसरों ने चुप्पी साध रखी है।

21 सितम्बर 2017 को शिकायतकर्ता वीरेन्द्र मेहता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हलफनामे के साथ शिकायत की थी। इस पर 11 अक्टूबर 2017 को विज्ञान और पूर्व प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्री के पूर्व निजी सचिव डी.एन. सिंह ने प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीएसटी में हुई नियुक्तियों में घोटाले की जांच के लिए पत्र लिखा था। इस पत्र के बाद मुख्यमंत्री के पूर्व विशेष सचिव अमित सिंह ने 21 जनवरी 2018 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर 15 दिन के अंदर नियुक्ति घोटाले की आख्या मांगी।

5 आईएएस अफसर नहीं पूरी कर पाए जांच

मामला ताकतवर लोगो का होने के कारण 27 मार्च 2018 को पूर्व प्रमुख सचिव हेमंत राव ने राजस्व परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रवीर कुमार को जांच सौंपी। लगभग एक साल तक जांच रूकी रही। इसी बीच प्रवीर कुमार रिटायर हो गए। इसके बाद 5 सितम्बर 2019 को पूर्व अपर मुख्य सचिव कुमार कमलेश ने इस नियुक्ति घोटाले की जांच प्राविधिक शिक्षा विभाग की पूर्व प्रमुख सचिव श्रीमती राधा एस. चौहान को सौंपी। श्रीमती राधा एस. चौहान की केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति जाने के बाद मई 2022 में इस जांच को फिर राजस्व परिषद के पूर्व अध्यक्ष संजीव कुमार मित्तल को सौंपी। इन आईएएस महोदय ने भी जांच पूरी नहीं की और रिटायर हो गए। तब से यह जांच ठंडे बस्ते में पड़ी हुई थी, मामले की गंभीरता देखते हुए योगी सरकार ने इस नियुक्ति घोटाले की जांच राजस्व परिषद के अध्यक्ष अनिल कुमार को सौंपी है। मई माह में इनका रिटायरमेंट है। उम्मीद नहीं है कि यह जांच पूरी हो पाएगी।

रोक के बावजूद हुई अवैध नियुक्तियां

15 मई 2012 को नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव राजीव कुमार ने एक शासनादेश के जरिए लोकसेवा आयोग और कोर्ट के अनुपालन की जाने वाली भर्तियों को छोडक़र सभी प्रकार की भर्तियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। 5 जुलाई 2013 को पूर्व मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने भर्ती पर प्रतिबंध के शिथिलीकरण के संबंध में सभी विभागों को निर्देशित किया गया कि अपरिहार्य स्थिति में अगर कोई नियुक्ति की जानी है तो पत्रावली कार्मिक विभाग के माध्यम से वित्त विभाग की परामर्श के बाद नियुक्ति होगी। इन प्रतिबंधों की जानकारी के बावजूद विज्ञान एवं प्रौद्योगिक परिषद ने सितम्बर 2016 और अक्टूबर 2016 में तीन पदों ज्वाइंट डायरेक्टर इंफार्मेंशन एंड टेक्नोलॉजी, ज्वाइंट डायरेक्टर रिसर्च, ज्वाइंट डायरेक्टर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर डेवलम्पमेंट एंड इन्नोवेशन कई समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित करवाया था।

विवादित नियुक्तियां

शिकायतों में आरोप लगाए गए कि संयुक्त निदेशक पद के लिए निकाले गए विज्ञापन में डा. राजेश कुमार गंगवार ने आवेदन ही नहीं किया था। डा. राजेश कुमार गंगवार ने सीएसटी/03/2016 के लिए किया था। स्क्रीनिंग के लिए गठित समिति ने डा. गंगवार को नॉट फॉर एलिजबेल पाया। इसके बाद इन महोदय का चयन संयुक्त निदेशक रिसर्च पर कर दिया गया। इसी तरह संयुक्त निदेशक आईटी के पद पर सुश्री पूजा यादव की नियुक्ति हुई। शिकायतों में कहा गया कि सुश्री पूजा यादव अर्हता और अनुभव न रखने के बावजूद भी नियुक्ति दी गई।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नक्षत्रशाला के राज्य परियोजना समन्वयक अनिल कुमार यादव पर कई नियुक्तिां और वित्तीय घोटाले के आरोप होने के बावजूद 20 अप्रैल 2016 को सीएसटी के निदेशक और सचिव का चार्ज भी दिया गया। इन महोदय की नियुक्ति की मूल पत्रावली ही गायब है। प्रशासनिक अधिकारी राजेश कुमार दीक्षित ने 5 अप्रैल 2019 को वजीरगंज थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी। संयुक्त निदेशक आईटी के पद पर नियुक्ति की गई पूजा यादव अनिल कुमार यादव की सगी भांजी हैं। सीएसटी के पूर्व सचिव ने अनिल यादव और पूजा यादव को नोटिस जारी कर फैमली ट्री के बारे में पूछा था। कई नोटिसों के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया था।

राजनीतिक शक्ति ने दबा रखा है प्रकरण

सीएसटी और विज्ञान प्रौद्योगिकी परिषद विभाग के सूत्रों का कहना है कि नियुक्तियों का घोटाला न खुले इसको हर स्तर से दबाया जा रहा है। हैरत की बात यह है कि मोदी और योगी सरकार इस नियुक्ति के घोटाले की जांच के लिए कई प्रयास किए हैं, लेकिन सभी प्रयास असफल हुए हैं। विभाग के प्रमुख सचिव पंधारी यादव और पूर्व कार्यवाहक निदेशक शीलधर यादव इन अवैध नियुक्तियों की जांच को किसी अदृश्य शक्ति के निर्देश पर दबाए रखे थे। इस प्रकरण पर संयुक्त निदेशक रिसर्च डा. गंगवार, संयुक्त निदेशक आईटी सुश्री पूजा यादव से सम्पर्क किए जाने पर कोई भी जवाब नहीं दिया है।

शासन सूत्रों के मुताबिक विज्ञान एवं प्रोद्यौगिक प्रमुख सचिव पंधारी यादव इस प्रकरण को रफा-दफा करवाने के लिए सीएसटी के कार्यवाहक निदेशक एवं सचिव और विशेष सचिव रमेश चंद्र  को लगा गया है। यही वजह है कि सीएसटी की प्रस्तुतकर्ता अधिकारी व संयुक्त निदेशक डा. हुमा मुस्तफा को हटाकर कार्यवाहक निदेशक एवं सचिव और विशेष सचिव रमेश चंद्र प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया गया है। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारी राजेश कुमार दीक्षित को हटाकर फकीरे लाल यादव को जिम्मेदारी दी गई है। सूत्रों का कहना है कि प्रमुख सचिव पंधारी यादव ने अपने खास सेवादार नियुक्तियों के घोटाले का मास्टर माइंड अनिल यादव को तकनीकी सलाहकार समिति का सदस्य 20 जनवरी 2025 को बनाया था। विज्ञान एवं प्रोद्यौगिक मंत्री अनिल कुमार से सम्पर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई। जबकि प्रमुख सचिव पंधारी यादव ने कोई भी प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया। यही हाल विशेष सचिव रमेश चंद्र का रहा। विभागीय मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि मामला संज्ञान में है। आवश्यक कार्यवाही के लिए अफसरों को निर्देशित किया गया है।

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NDS Desk

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