उत्तर प्रदेश

UP Bureaucracy: रिमोट सेंसिंग अप्लीकेशन सेंटर के दागियों में हडक़म्प!

शिकायतों पर योगी सरकार करेगी कार्रवाई

UP Bureaucracy: लखनऊ। यूपी के अति संवेदनशील रिमोट सेंसिंग अप्लीकेशन सेंटर यानी इस वैज्ञानिक संस्थान में दागियों के संरक्षण दाता प्रमोटी आईएएस शीलधर सिंह यादव की विदाई के बाद उम्मीद जागी है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई होगी। सरकार की इस कार्रवाई से भ्रष्टाचारियों में हडक़म्प है।

भाजपा एमएलसी से मांगा शिकायत की पुष्टि का हलफनामा

आपको बताते चलें कि अम्बेडकर महासभा के अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य डा. लालजी निर्मल ने 5 जून 2025 को  रिमोट सेंसिंग अप्लीकेशन सेंटर के प्रशासनिक अधिकारी दयाशंकर के भ्रष्टाचार और निदेशक शीलधर सिंह यादव की मिलीभगत की शिकायत विभागीय मंत्री से की थी। इस पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिक विभाग के अनुसचिव हरिशचंद्र ने 6 जुलाई 2025 को विधान परिषद सदस्य डा. लालजी निर्मल को पत्र लिखकर शिकायत की पुष्टिï करने का कष्टï करें। पत्र के दूसरा पैरा गौर करने लायक है। दूसरे पैरे में उल्लेख किया गया है कि कृपया यह पुष्टिï करने की कृपा करें कि पत्र आपके द्वारा हस्ताक्षरित है और शिकायत के संबंध में आपको संतोष हो गया है कि शिकायत तथ्यों पर आधारित है, ताकि प्रकरण में अगे्रेतर कार्यवाही की जा सके। इस पत्र के बाद विधान परिषद सदस्य डा. लालजी निर्मल ने इस प्रकरण पर चुप्पी साध ली है। उनके कई बार सम्पर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई। सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में अफसरों की कार्य प्रणाली पर नाराजगी जताते हुए विधान परिषद सदस्य डा. लालजी निर्मल ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिक मंत्री अनिल कुमार से शिकायत की है।

यह भी पढ़े: UP Bureaucracy: दागियों के दाग से रंगे प्रमोटी आईएएस शीलधर सिंह यादव की हुई विदाई!

डाटा चोर वैज्ञानिक को मिला था पूर्व निदेशक का संरक्षण

एमएलसी के साथ ही नागालैंण्ड के प्रोफेसर डा. वीरेन्द्र कुमार ने 26 जून 2025 को एक पत्र विभागीय मंत्री और प्रमुख सचिव को लिखा था। जिसमें डाटा चोर वैज्ञानिक आलोक सैनी और प्रशासनिक अधिकारी दया शंकर के कारनामों की पोल खोल कर रख दी है। विधान परिषद सदस्य ने रिमोट सेंसिंग अप्लीकेशन सेंटर के एक दागी और भ्रष्टाचारी वैज्ञानिक आलोक सैनी को देखें। इनके खिलाफ डाटा चोरी के मामले में गुडम्बा थाने में एफआईआर दर्ज है। इनके कारनामें को लेकर रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के पूर्व वैज्ञानिक अश्वनी श्रीवास्तव ने 25 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सम्बोधित एक शिकायत पत्र भेजा था।

कासगंज सदर भाजपा विधायक देवेन्द्र सिंह राजपूत ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को डाटा चोर वैज्ञानिक आलोक सैनी के कारनामों को लेकर पत्र लिखकर जांच की मांग की थी। पत्र में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2004 में वैज्ञानिक आलोक सैनी और उनकी पत्नी को प्रतिबंधित उपग्रहीय आंकड़ों की चोरी और विक्रय के मामले में पूर्व निदेशक डा. नवनीत कुमार सहगल ने निलम्बित कर एफआईआर दर्ज करवा कर जेल भिजवाया था। गुडम्बा थाने में डाटा चोर वैज्ञानिक आलोक सैनी के खिलाफ वाद संख्या 168/2004 के तहत धारा 406, 409, 420, 120 बी, और 64/65 कापी राइट समेत विभिन्न गंभीर धाराओं में केस  दर्ज हुआ था।

UP Bureaucracy: भ्रष्ट अफसर दया शंकर के भ्रष्टाचार पर मौन रहे निदेशक और प्रमुख सचिव

रिमोट सेंसिंग अप्लीकेशन सेंटर के कुख्यात दागी और भ्रष्टाचारी प्रशासनिक अधिकारी दयाशंकर है। इस भ्रष्टाचारी प्रशासनिक अधिकारी के 23 फरवरी 2024 को काले कारनामों की 12 बिन्दुओं पर हुई जांच में 11 साबित हुए थे। इन दोनों दागियों की तमाम शिकायतों और गड़बडियों के बावजूद रिमोट सेंसिंग अप्लीकेशन सेंटर के दोनों दागियों और भ्रष्टïाचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिक विभाग के प्रमुख सचिव पंधारी यादव और रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर के निदेशक और विशेष सचिव शीलधर सिंह यादव की दोनों दागी और भ्रष्टाचारी पर खासा संरक्षण है। इनकी मेहरबानी आप देश सकते हैं कि 14 सितम्बर 2024 को निदेशक शीलधर यादव ने दया शंकर को व्यवस्थाधिकारी नामित किया। जबकि सेवा नियमावली में व्यवस्थाधिकारी का पद नहीं है। नियमों को ताक पर रखकर वेतन वृद्घि दी गई। दया शंकार को लाभ पहुंचाने के लिए 17 मार्च 2025 को श्रीमती श्वेता पाल को प्रशासनिक अधिकारी का दायित्व सौंपा गया। जबकि 3 अप्रैल 2025 को श्रीमती श्वेता पाल को प्रशासनिक अधिकारी से मुक्त करते हुए अपने आंख के तारे दया शंकर को यह जिम्मेदारी दी।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव पंधारी यादव ने कहा कि नियमानुार कार्यवाही की जा रही है। जबकि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि किसी भी तरह की अनियमितताओं को बख्शा नहीं जाएगा।

यह भी पढ़े: UP Bureaucracy: हवा-हवाई साबित हो रहे ‘सीएसटी’ में हुए नियुक्ति घोटाले की जांच!

इ-पेपर : Divya Sandesh

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