लखनऊ में ई-रिक्शा का जोनवार कलर कोड हुआ लागू, मिलेगा जाम से छुटकारा!
गीन हुआ ई-रिक्शा, सड़कें हुईं रवान!
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E-Rickshaw: लखनऊ की सड़कों पर जाम की समस्या को कम करने के लिए, एक अभिनव समाधान लागू किया गया है – ई-रिक्शा का जोनवार कलर कोडिंग! यह पहल न सिर्फ यातायात व्यवस्था को सुगम बनाएगी बल्कि प्रदूषण कम करने में भी सहायक होगी.
कैसे काम करता है जोनवार कलर कोडिंग सिस्टम?
लखनऊ शहर को चार प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है:
- उत्तरी जोन – हरा रंग
- दक्षिणी जोन – नीला रंग
- पूर्वी जोन – पीला रंग
- पश्चिमी जोन – लाल रंग
प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग रंग निर्धारित हैं. ई-रिक्शा चालकों को उनके परिचालन क्षेत्र के अनुसार रंगीन परमिट जारी किए जाएंगे. इसका मतलब है कि एक खास रंग का ई-रिक्शा उसी रंग वाले निर्धारित क्षेत्र में ही चल पाएगा. उदाहरण के लिए, हरे रंग का ई-रिक्शा केवल उत्तरी क्षेत्र में ही सवारियों को बिठा-उतार सकेगा.
जोनवार कलर कोडिंग के लाभ:
- यातायात व्यवस्था में सुधार: सड़कों पर ई-रिक्शा की संख्या नियंत्रित करने से जाम की समस्या कम होगी. इससे न सिर्फ यात्रियों को बल्कि अन्य वाहन चालकों को भी सहूलियत होगी.
- प्रदूषण में कमी: कम जाम का सीधा मतलब है वाहनों से होने वाला प्रदूषण कम होना. यह शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद करेगा.
- ई-रिक्शा चालकों की आय में वृद्धि: निर्धारित क्षेत्रों में ई-रिक्शा की संख्या सीमित होने से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनेगी और चालकों की आय में वृद्धि होगी.
क्या योजना सफल है?
जी हाँ, लखनऊ में लागू किया गया जोनवार कलर कोडिंग काफी सफल साबित हो रहा है. इस पहल को देखते हुए अन्य शहरों में भी इसे लागू करने पर विचार किया जा रहा है.
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