‘शरीफ आईएएस’ की फिज़ूलखर्ची!
Ias officer corruption : एनडीएस ब्यूरो लखनऊ। योगी सरकार की मित्तव्यतिता की नीति को सिरे से नकारने वाले आईएएस अफसरों की शाहखर्च के किस्से आए दिन आप सुनते रहते हैं। अब इसमें चीफ सेके्रटरी इन वेटिंग की लाइन में लगे कृषि उत्पादन आयुक्त (APC) का नाम भी शुमार हो गया है। एपीसी महोदय ने चीफ सेक्रेटरी की कुर्सी तक पहुंचने में देरी देखकर सचिवालय स्थिति अपना कार्यालय और सभाकक्ष का लुक चीफ सेके्रटरी तरह करवाने के लिए खजाने का मुंह खोल दिया है। एपीसी के कार्यालय और सभाकक्ष के नवीनकरण पर करोड़ों रुपए खर्च के मुद्दे पर एपीसी और राज्य सम्पत्ति विभाग व लोक निर्माण विभाग के मुंह पर ताला जड़ गया है। एपीसी का कारनामा सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बतातें चलें कि 1988 बैच के वरिष्ठ आईएएस मनोज कुमार सिंह की कार्यप्रणाली को यूपी के अधिकतर प्रशासनिक अफसर भली-भांति जानते हैं। जिस-जिस विभाग में तैनाती रही, वहां अनियिमतताओं के खेल खूब हुए। हर एक से मनमुटाव और झगड़ा हुआ है। जिसमें सबसे अधिक चर्चित मनरेगा रहा है। इनके कार्यकाल में ऐसे-ऐसे कारनामें हुए, जिनकी गूंज सीबीआई तक पहुंची। इसके साथ ही ग्राम्य आयुक्त के पद पर रहने के दौरान एक महिला ने इन शरीफ आईएएस महोदय पर शारीरिक शोषण का आरोप लगाकर मायावती सरकार के कार्यकाल में सनसनी फैला दिया था।
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मौजूदा सरकार में काफी प्रभावशाली हैं। इनका प्रभाव आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि महत्वपूर्ण विभाग ग्राम्य विकास विभाग और पंचायतीराज होने के बावजूद आठ अफसरों को सुपरसीड कर मई माह में एपीसी बनाया गया था।
शासन के सूत्रों का कहना है कि सूबे की नौकरशाही के बीच एपीसी महोदय की छवि काफी खराब है। लेकिन किसी भी अफसर में विरोध की ताकत नहीं जुटा पा रहा है। एपीसी बनने के बाद मुख्य सचिव का पद पाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। मई माह में एपीसी बनने के बाद उम्मीद थी मौजूदा मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र दिल्ली के राज्यपाल बन जाएंगे और उनका मुख्य सचिव बनने का रास्ता साफ हो जाएगा। लेकिन उम्मीद पूरी नहीं हुई।
वर्तमान मुख्य सचिव का कार्यकाल दिसम्बर 2022 तक का है। ऐसे में मुख्य सचिव के पद पर पहुंचने के लिए अभी से प्रेक्टिस शुरू कर दी है। पहले चरण में एपीसी का जहां कार्यालय था वहां सभा कक्ष बनवाया जा रहा है और जहां सभाकक्ष था वहां कार्यालय बनवाया जा रहा है। मई के प्रथम सप्ताह तक बैठने के बाद इस फेरबदल का निर्णय हुआ था। इसके बाद से एपीसी इस कार्यालय में न बैठकर मनरेगा कार्यालय से काम कर रहे हैं। सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि एपीसी कार्यालय की गैलरी के बाहर अब अनुसेवकों को बैठने तक की इजाजत नहीं है। इसके साथ ही अधीनस्थ अफसरों से खूब अभद्र व्यवहार की शिकायतें हैं। एपीसी कार्यालय और सभा कक्ष के नवीनीकरण पर करोड़ों रुपए खर्च करने की चर्चा है।
राज्य सम्पत्ति अधिकारी बी.के. सिंह ने कहा कि एपीसी कार्यालय के नवीनीकरण का कार्य राज्य सम्पत्ति विभाग द्वारा कराए जाने की सूचना नहीं है। लोक निर्माण विभाग से जानकारी करें। लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने इस मुद्दे पर कोई भी बात करने से मना कर दिया। एपीसी Ias manoj kumar singh से सम्पर्क किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।
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