तेलंगाना आंदोलन के दौरान कई ऐसे नेता थे, जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के आंदोलन का साथ दिया… उसूलों की बुलंद आवाज़ चौधरी अजित सिंह ऐसे नेताओं में सबसे पहले पायदान पर खड़े थे और इस बात को तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री KCR की बेटी के कविता भी स्वीकार रही हैं…के कविता का ये कहना कि, “चौधरी अजित सिंह जी ने तेलंगाना बनाने के लिए इस्तीफा तक दे दिया था, मगर ये दुर्भाग्य रहा कि राज्य बनने के बाद उनको वह सम्मान और आदर नहीं मिल पाया, जिसके वे वास्तव में हक़दार थे…”
पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी कविता द्वारा ये कहना अपने-आप में बहुत कुछ कह जाता है। कविता ने भावुक होकर यह स्वीकार किया कि जिन नेताओं ने तेलंगाना के लिए अपने पद और सत्ता तक दांव पर लगा दिए, उन्हें बाद में भुला दिया गया।
चौधरी अजित सिंह ऐसे ही विरले नेताओं में से थे- जो उसूलों के लिए सत्ता से टकरा जाना जानते थे, जो सच के साथ खड़े रहने के लिए सत्ता को ठोकर मारने कि हिम्मत रखते थे, और जिनके लिए राजनीति से पहले सिद्धांत और न्याय थे।
तेलंगाना के समर्थन में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया…कविता का यह कहना कि “आज भावनाओं पर नियंत्रण नहीं है”, दरअसल उन सभी नेताओं की पीड़ा की अभिव्यक्ति है, जिन्होंने बिना किसी अपेक्षा के संघर्ष का साथ दिया। चौधरी अजित सिंह का जीवन इस बात का प्रमाण है कि महानता सत्ता से नहीं, त्याग से मापी जाती है। आज जब राजनीति में अवसरवाद हावी है, तब चौधरी अजित सिंह जैसे नेता याद दिलाते हैं कि:- सत्ता के बिना भी बड़ा हुआ जा सकता है, लेकिन उसूलों के बिना कभी नहीं।
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