उत्तर प्रदेश

सुनियोजित हुआ नवनीत सहगल का डिजिटल चरित्र हनन!

पूर्व आईएएस की विश्वसनीयता को कमजोर करने का खेल!

Navneet Sehgal: लखनऊ। देश की नौकरशाही और सार्वजनिक प्रसारण तंत्र में दशकों तक अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व आईएएस और प्रसार भारती के पूर्व अध्यक्ष नवनीत कुमार सहगल अचानक सोशल मीडिया के डिजिटल कटघरे में खड़े कर दिए गए हैं। न किसी सरकारी जांच या विभागीय नोटिस से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के डिजिटल हथियारों से घिरे नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर फैलाए प्रोपोगंडा को डा. सहगल के समर्थक सोची-समझी राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।

आपको बताते चलें कि 2 दिसंबर 2025 में डा. नवनीत कुमार सहगल (Navneet Sehgal) के अचानक इस्तीफे के बाद जिस तरह से उन्हें लेकर नैरेटिव गढ़ा जा गया है, वह अब केवल आलोचना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित डिजिटल चरित्र हनन अभियान जैसा दिखने लगा है। समर्थकों का आरोप है कि यह सब ऐसे समय किया जा रहा है, जब सत्ता तंत्र में कुछ अहम फेरबदल की चर्चाएँ चल रही हैं। सूत्रों का कहना है कि चरित्र हनन के खेल में दिल्ली और यूपी लॉबी के कुछ आईएएस अफसरों ने हवा दी।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नियुक्ति, प्रभाव और नियंत्रण की अदृश्य लड़ाई का हिस्सा बनता जा रहा है। सोशल मीडिया के जरिये जनमत को प्रभावित कर पहले छवि को धूमिल करना और फिर संभावनाओं पर विराम लगाना यह रणनीति अब खुलकर सामने आ रही है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या यह सब एक तयशुदा रणनीति के तहत किया गया प्रयास है ताकि एक पूर्व शीर्ष अधिकारी की सार्वजनिक विश्वसनीयता को कमजोर किया जा सके। समर्थकों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली अकाउंट्स के जरिये चुनिंदा सूचनाएं फैलाकर डा. सहगल की छवि को संदेह के घेरे में डालने की कोशिश की जा रही है। वहीं आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक पदों पर रहे अधिकारियों पर सवाल उठाना लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है, लेकिन जिस लहजे और समय निर्धारण के साथ ये पोस्ट सामने आए हैं, वह इसे सामान्य आलोचना से कहीं आगे ले जाता है।

फिलहाल सरकार की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह तय है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की छवि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता, मीडिया और सोशल मीडिया के बीच चल रही नई राजनीतिक लड़ाई का संकेत भी बन गया है।

एक्स पर कुछ पोस्ट वरिष्ठ पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी और रविश कुमार द्वारा किए जाने के बाद से चर्चाओं का दौर गर्म हुआ। अब केवल आलोचना नहीं, बल्कि राजनीतिक नैरेटिव गढऩे की मुहिम जैसे दिखने लगे हैं। समर्थकों का आरोप है कि डा. सहगल के इस्तीफे के बाद से उनके खिलाफ चयनित सूचनाओं को बार-बार उछालकर उनकी छवि पर योजनाबद्ध प्रहार किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह वही पुरानी रणनीति है। पहले शक पैदा करो, फिर संभावनाओं को खत्म करो। सवाल उठ रहा है कि क्या अब नियुक्तियाँ और पदों की राह सोशल मीडिया की अदालत से होकर तय होगी।

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इ-पेपर : Divya Sandesh

NDS Desk

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