एनडीएस ब्यूरो
लखनऊ। योगी सरकार भ्रष्टïाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को ढोल-मंजीरा लेकर दुहाई देती है, लेकिन ‘गांधी दर्शन’ में डूबे आवास एवं विकास परिषद के कुछ अफसर उस ढोल को दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं। जहां गाजियाबाद की सिद्घार्थ विहार योजना में हुए हजारों करोड़ रुपए की पूर्व मेरठ मण्डलायुक्त की अध्यक्षता वाली एसआईटी की जांच रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए घोटालेबाजों को क्लीन चिट दे दी है वहीं विभाग के आवास मंत्री के तौर मुख्यमंत्री की छवि से खिलवाड़ कर रहे हैं। यह मामला सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
आपको बताते चलें कि भाजपा नेता पंडित सुनील भराला ने 5 अगस्त 2022 को की थी। इस पर पूर्व प्रमुख सचिव आवास ने 28 जुलाई 2022 को एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। 5 अगस्त 2022 को मण्डलायुक्त मेरठ मण्डल की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इस पर 22 फरवरी 2023 को पूर्व मण्डलायुक्त सेल्वा कुमारी ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दी। जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि उत्तर प्रदेश सहकारी नियमावली का नियम 397 का उल्लंघन हुआ है। सहकारिता विभाग ने जो एनओसी जारी की है, वह त्रुटि पूर्ण है। 2 जून 2023 को गाजियाबाद और गौतम बुद्घ नगर की विभिन्न सहकारी समितियों काफमो सहकारी आवास समिति, न्यू जागृति एन्क्लेव, शताब्दी सहकारी आवास समिति, एन.आर. कर्मचारी सहकारी आवास समिति, उत्तर रेलवे सहकारी आवास समिति, केन्द्रीय जल आयोग सहकारी आवास समिति, आदर्श सहकारी आवास समिति को निर्गत एनओसी की समीक्षा की गई थी। सहकारिता विभाग ने एनओसी के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी, यानी स्थागित कर दी थी। साथ ही सहकारी अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही करने के साथ ही चेतावनी भी दी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सहकारिता विभाग के गाजियाबाद और गौतमबुद्घ नगर के दोनों कार्यालय ज्ञापों के अध्ययन से पता चलता है कि बिल्डर व समिति का सांठगांठ रहा। बिल्डर्स और डेवलपर्स द्वारा निबंधक सहकारिता के अनुमोदित अनुबंध के बाद ही रेरा में पंजीकरण कर प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं। रेरा अथारिटी में किया गया पंजीकरण अवैध है।
आवास एवं विकास परिषद के सूत्रों का कहना है कि साढ़े छह साल से अपर आवास आयुक्त एवं सचिव के पद पर जमे डा. नीरज शुक्ला ने अपर आवास आयुक्त और अपर निबंधक दीपक सिंह से सांठगांठ कर नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली सहकारी आवास समितियों को क्लीन चिट दे दी है। जबकि पूर्व मेरठ मण्डलायुक्त की जांच रिपोर्ट के तहत स्थागित हुई एनओसी पर मुहर लगा दी है। सूत्रों का कहना है कि इसमें भारी भरकम गांधी प्रेम चला है। गांधी प्रेम में वशीभूत आवास एवं विकास परिषद के कुछ अफसरों ने गाजियाबाद में फ्लैट हासिल कर लिया है। तभी झटके में एक साथ 14 सहकारी समितियों के अनियमितताओं पर क्लीन चिट देते हुए आवास एवं विकास परिषद की बोर्ड बैठक में इस एंजेंडे पर मुहर लगवाने की तैयारी है।
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