गांधी दर्शन में डूबे ‘आविपा’ के दीमक कर रहे योगी की छवि के साथ खिलवाड़
हजारों करोड़ के घपले को गुपचुप दे दी क्लीनचिट

- पूर्व मण्डलायुक्त की जांच रिपोर्ट फेंकी गई कूड़ेदान में
- ‘आविपा’ में तैनात आईएएस अफसरों ने साधी चुप्पी
- साढ़े छह साल से आविपा’ में डटा आईएएस बना है बिल्डरों का रहनुमा
एनडीएस ब्यूरो
लखनऊ। योगी सरकार भ्रष्टïाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को ढोल-मंजीरा लेकर दुहाई देती है, लेकिन ‘गांधी दर्शन’ में डूबे आवास एवं विकास परिषद के कुछ अफसर उस ढोल को दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं। जहां गाजियाबाद की सिद्घार्थ विहार योजना में हुए हजारों करोड़ रुपए की पूर्व मेरठ मण्डलायुक्त की अध्यक्षता वाली एसआईटी की जांच रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए घोटालेबाजों को क्लीन चिट दे दी है वहीं विभाग के आवास मंत्री के तौर मुख्यमंत्री की छवि से खिलवाड़ कर रहे हैं। यह मामला सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

आपको बताते चलें कि भाजपा नेता पंडित सुनील भराला ने 5 अगस्त 2022 को की थी। इस पर पूर्व प्रमुख सचिव आवास ने 28 जुलाई 2022 को एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। 5 अगस्त 2022 को मण्डलायुक्त मेरठ मण्डल की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इस पर 22 फरवरी 2023 को पूर्व मण्डलायुक्त सेल्वा कुमारी ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दी। जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि उत्तर प्रदेश सहकारी नियमावली का नियम 397 का उल्लंघन हुआ है। सहकारिता विभाग ने जो एनओसी जारी की है, वह त्रुटि पूर्ण है। 2 जून 2023 को गाजियाबाद और गौतम बुद्घ नगर की विभिन्न सहकारी समितियों काफमो सहकारी आवास समिति, न्यू जागृति एन्क्लेव, शताब्दी सहकारी आवास समिति, एन.आर. कर्मचारी सहकारी आवास समिति, उत्तर रेलवे सहकारी आवास समिति, केन्द्रीय जल आयोग सहकारी आवास समिति, आदर्श सहकारी आवास समिति को निर्गत एनओसी की समीक्षा की गई थी। सहकारिता विभाग ने एनओसी के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी, यानी स्थागित कर दी थी। साथ ही सहकारी अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही करने के साथ ही चेतावनी भी दी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सहकारिता विभाग के गाजियाबाद और गौतमबुद्घ नगर के दोनों कार्यालय ज्ञापों के अध्ययन से पता चलता है कि बिल्डर व समिति का सांठगांठ रहा। बिल्डर्स और डेवलपर्स द्वारा निबंधक सहकारिता के अनुमोदित अनुबंध के बाद ही रेरा में पंजीकरण कर प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं। रेरा अथारिटी में किया गया पंजीकरण अवैध है।
आवास एवं विकास परिषद के अपर आवास आयुक्त और अपर निबंधक दीपक सिंह ने बीती 22 मई 2026 को अपर आवास आयुक्त एवं सचिव नीरज शुक्ला के निर्देश पर गाजियाबाद की सिद्घार्थ विहार की 14 सहकारी समितियों उत्तर रेलवे दूरसंचार सहकारी आवास समिति, आदर्श आवास सहकारी समिति, आदर्श नगर प्रतिशील सहकारी आवास समिति, एन.आर. कर्मचारी सहकारी आवास समिति, केन्द्रीय जल आयोग सहकारी आवास समिति, लोकसभा कर्मचारी आवास सहकारी समिति, काफमो सहकारी आवास समिति, पंचशील सहकारी आवास समिति, नवयुग सहकारी आवास समिति, न्यू जागृति एन्क्लेव सहकारी आवास समिति, शताब्दी सहकारी आवास समिति, फ्रेंडस रेलवे सहकारी आवास समिति की जांच आख्या में क्लीनचिट दे दी है।
आवास एवं विकास परिषद के सूत्रों का कहना है कि साढ़े छह साल से अपर आवास आयुक्त एवं सचिव के पद पर जमे डा. नीरज शुक्ला ने अपर आवास आयुक्त और अपर निबंधक दीपक सिंह से सांठगांठ कर नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली सहकारी आवास समितियों को क्लीन चिट दे दी है। जबकि पूर्व मेरठ मण्डलायुक्त की जांच रिपोर्ट के तहत स्थागित हुई एनओसी पर मुहर लगा दी है। सूत्रों का कहना है कि इसमें भारी भरकम गांधी प्रेम चला है। गांधी प्रेम में वशीभूत आवास एवं विकास परिषद के कुछ अफसरों ने गाजियाबाद में फ्लैट हासिल कर लिया है। तभी झटके में एक साथ 14 सहकारी समितियों के अनियमितताओं पर क्लीन चिट देते हुए आवास एवं विकास परिषद की बोर्ड बैठक में इस एंजेंडे पर मुहर लगवाने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री से जुड़े आवास एवं विकास परषिद के आला अफसर कितने संवदेनशील हैं, यह इस बात से पता चलता है कि जब इस प्रकरण में प्रतिक्रिया के लिए सम्पर्क किया तो हजारों करोड़ रुपए के घपले को क्लीनचिट देने के मामले में चाहे प्रमुख सचिव पी. गुरू प्रसाद हों, या फिर सचिव बलकार सिंह हो या फिर साढ़े छह साल से बिल्डरों के रहनुमा बने अपर आवास आयुक्त एवं सचिव डा. नीरज शुक्ला हो या फिर अपर निबंधक दीपक सिंह हो, इन सभी ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी।



