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कहानी आयरन लेडी मायावती और स्ट्रीट फाइटर ममता की!

लड़े तो हीरो, सरेंडर किए जीरो!

लखनऊ। देश की सियासत में दो राजनीतिक हस्तियां मायावती और ममता बनर्जी की कहानी बिल्कुल उलट है, एक तरफ ममता बनर्जी (दीदी) फायरब्रांड हीरो बनकर मैदान में डटी हुई हैं, ED की रेड पर खुद पहुंचीं, फाइलें छीनकर निकलीं और 10 किमी का विरोध मार्च निकालकर BJP को ललकारा। दूसरी तरफ मायावती (बहनजी) की BSP जीरो पर पहुंच गई। 2026 में संसद से पूरी तरह बाहर, 36 साल बाद पहली बार बसपा का कोई MP नहीं, लोकसभा में पहले से 0, राज्यसभा का आखिरी सदस्य नवंबर 2026 में रिटायर हो रहा है।

8 जनवरी 2026 को ED ने I-PAC (TMC की चुनावी स्ट्रैटेजी फर्म) और उसके चीफ प्रतीक जैन के घर पर रेड डाली – कोयला घोटाले के नाम पर। लेकिन दीदी ने राजनीतिक रिफ्लेक्स दिखाया: खुद साइट पर पहुंचीं, हरे रंग की फाइलें हाथ में लेकर निकलीं, ED पर आरोप लगाया कि “चुनावी डेटा, कैंडिडेट लिस्ट चुराने की साजिश”। उन्होंने कहा, “अमित शाह की ड्यूटी क्या है? पार्टी की हार्ड डिस्क इकट्ठा करना?”

9 जनवरी को कोलकाता में 10 किमी लंबा मार्च – हजारों TMC कार्यकर्ता, नारे, “हम 2026 में बंगाल जीतेंगे, लेकिन BJP 2029 तक केंद्र में नहीं रहेगी!”। दिल्ली में TMC MPs अमित शाह ऑफिस के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, पुलिस ने डिटेन किया, लेकिन दीदी ने ट्वीट कर कहा – “लड़ाई आर-पार!”। ये है स्ट्रीट फाइटर का असली जलवा – सिंगूर-नंदीग्राम से लेकर अब ED तक, कभी पीछे नहीं हटीं।बहनजी का जीरो स्कोर मायावती 2007 में अकेले 206 सीटें जीत चुकीं – दलितों की आयरन लेडी। लेकिन अब? 2024 लोकसभा में 0 सीट, वोट शेयर 2% से नीचे। UP विधानसभा में सिर्फ 1 MLA। नवंबर 2026 में राज्यसभा से रामजी गौतम का टर्म खत्म – बसपा संसद से पूरी तरह गायब। कारण? पार्टी में दूसरी पंक्ति नहीं, ग्रासरूट से दूरी, परिवारवाद (भतीजे अकाश आनंद को निकाला), दलित वोट BJP (गैर-जाटव) और SP (PDA) में बंटा। चुप्पी और कोई बड़ा आंदोलन न होने से “सरेंडर” वाली छवि। BSP अब राष्ट्रीय पार्टी का स्टेटस भी खो सकती है।

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