WTO meeting
WTO meeting : नयी दिल्ली वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जेनेवा में विश्व व्यापार संगठन (WTO) की बैठक में अनाज की सरकारी खरीद और भंडार को गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों की आबादी की खाद्य सुरक्षा को बहुत जरूरी बताते हुए इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने की पुरजोर अपील की है।
डब्ल्यूटीओ की 12वें मंत्री स्तरीय की बैठक में श्री गोयल ने मत्स्य पालन को भी गरीबों की खाद्य सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि मत्स्य उद्योग पर सब्सिडी खत्म करने की बातचीत करते समय परंपरागत मछुआरों की खाद्य सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के समक्ष चुनौतियां विषय पर एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए यह भी कहा,“कोविड महामारी ने किसी संकट के समय तत्काल कार्रवाई करने की विश्व की अक्षमता को उजागर कर चुकी है।’ उन्होंने कहा कि महामारी के समय खाद्य सुरक्षा हो या स्वास्थ्य सुरक्षा, आर्थिक कुशलता हो या आपूर्ति श्रृंखला को खुला रखने का मुद्दा इन सबके मामले में कोविड-19 महामारी के समय दुनिया तत्काल कदम उठाने में विफल रही।”
श्री गोयल ने कहा,“दुनिया को जब राहत की जरूरत थी तब डब्ल्यूटीओ विफल दिखायी दिया। उदाहरण के लिए कोविड के दो साल बाद भी वैक्सीन की उपलब्धता के मामले में विषमता बनी रही। अल्पविकसित देशों और अनेक विकाशील देशों में लोगों को अब भी वैक्सीन नहीं मिली है जबकि कुछ देशों में लोगों को कोविड वैक्सीन का तीसरा या चौथा टीका भी लग चुका है।”
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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा,“यह वैश्विक संचालन व्यवस्था की सामूहिक विफलता है। इसका हमें आत्मानिरीक्षण करना चाहिए। जो इसके लिए जिम्मेदार है वे अपने दिल की गहरायी से अपने आप से इस बारे में पूछें। इससे हमें दुनिया के हर नागरिक के लिए अधिक समानतापूर्ण, समूचित और समृद्ध भविष्य के निर्माण में मदद मिलेगी और हम स्वस्थ विकास के लक्षण (एसजीडी) को हासिल कर लेंगे जिसका हमने सामूहिक रूप से संकल्प किया है।”
श्री गोयल ने कहा कि सरकारी खरीद और अनाज के सरकारी भंडार के मुद्दे का स्थायी समाधान हमें सबसे पहले हलका निकालना चाहिए ताकि इस बहुपक्षीय संगठन की विश्वसनीयता पुनः कायम हो सके। स्थायी समाधान निकालने के बारे में सहमति करीब एक दशक पहले हो चुकी और अबतक इसका समाधान नहीं निकला है।
उन्होंने कहा कि हाल के वैश्विक महामारी ने यह दिखा दिया है कि हमारे लिए इसपर कार्रवाई का समय आ गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या हम गरीब और कमजोर लोगों के लिए रखे गए अनाज के भंडार पर आश्रित लाखों लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल सकते हैं?
श्री गोयल ने कहा कि अकेले भारत में महामारी के दौरान देश की 80 करोड़ आबादी को 50 अरब डॉलर मूल्य का 10 करोड़ टन अनाज मुफ्त में दिया। उन्होंने कहा कि अनाज की यह मात्रा भारत के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के अतिरिक्त दिया गया ताकि देश में किसी को भूखा ना सोना पड़े।
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मछली उद्योग की सब्सिडी के बारे में उन्होंने कहा कि हम ऐसा कोई समझौता नहीं कर सकते जिसमें कुछ एक देशों का विशेषाधिकार सुरक्षित रहे और समाज के कमजोर और हाशिए पर रह रहे लोगों के कल्याण के लिए काम कर रहे बाकि देशों के प्रगति करने के अधिकार को छीन लिया जाए।
श्री गोयल ने कहा कि मछली उद्योग पर सब्सिडी के मामले में हर देश को एक तराजू पर नहीं तोला जा सकता। उन्होंने कहा कि देशों के बारे में अलग दृष्टिकोण रखने की जरूरत है जो गहरे समुद्र में खतरनाक तरीकों से मछली पकड़ने के व्यवसाय में लगे हैं। अन्यथा हम डब्ल्यूटीओ के कृषि व्यापार समझौते (AOA) की स्थिति में होंगे जहां आज भी असमानता और विषमता की स्थिति बनी हुयी है और उससे बहुत से देश आज भी अनाज के लिए सहायता पर निर्भर हैं।
श्री गोयल ने डब्ल्यूटीओ में सुधार के प्रस्ताव की खामियां गिनाते हुए कहा कि इसके संस्थागत ढांचे में ऐसे बदलाव आ जाएंगे जो विकाशील देशों के हितों के खिलाफ जाएंगे। उन्होंने कहा,“हमें सर्वसहमति और विशेष एवं विभेदकारी व्यवहार (SNDT) के मूल सिद्धांत को संरक्षित रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए और डब्ल्यूटीओ की कार्ययोजना के मूल में विकास होना चाहिए।”
श्री गोयल ने जलवायुु परिवर्तन के मुद्दे पर कहा कि विकसीत देशों की जिम्मेदारी विकासशील देशों से ज्यादा रखने की जरूरत है। उन्होंने इस संबंध में तर्क दिया की विकसीत देशों का प्रति व्यक्ति जीडीपी(सकल घरेलू उत्पाद) विकासशील देशों से 20-50 गुना अधिक है। यहां तक की भारत का भी प्रति व्यक्ति जीडीपी कम है जबकि देश पर 1.4 अरब की आबादी को संभालने का दायित्व है।
श्री गोयल ने कहा,“मुझे यकीन है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर विकासशील देश एक अच्छे भविष्य के लिए काम करना चाहते हैं। लेकिन क्या यह मानवीय, उचित और न्यायपूर्ण होगा की इस संबंध में विकासशील देशों पर विकसित देशों के बराबर ही बोझ डाला जाए।”
उन्होंने कहा कि भारत वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना में विश्वास रखता है। विश्व व्यापार संगठन को भरोसा बढ़ाना चाहिए। आज जरूरत इस बात की है कि विश्व एक परिवार की भावना के साथ गरीब और कमजोर आबादी के प्रति संवेदना, सद्भाव और उनके हित की चिंता प्रदर्शित की जाए।
श्री गोयल ने महामारी के मुद्दे पर एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि महामारी पर डब्ल्यूटीओ की कार्रवाई के संबंध में जेनेवा बैठक प्रस्ताव का मसौदा बहुत संतुलित रूप से तैयार किया गया है। उन्होंने इस मसौदे को तैयार करने में मदद करने वाले राजदूत डासियो कास्टिलो का धन्यवाद किया।
उन्होंने कहा कि केवल यही एक प्रस्ताव है जो इस मंत्री सम्मेलन के लिए बहुत शुद्ध तरीके से बातचीत कर तैयार किया गया है। श्री गोयल ने कहा कि इसके लिए बातचीत की प्रक्रिया के उच्च मानकों को अपनाया गया और हम उम्मीद करत हैं कि अन्य मामलों में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनायी जाएगी।
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