विधानसभा के संसदीय इतिहास में नया कीर्तिमान स्थापित
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के संसदीय इतिहास में प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 30 जुलाई 2008 से निरंतर सेवा देते हुए उन्होंने अब तक 18 वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा कर लिया है, जो विधानसभा के प्रमुख सचिव पद पर अब तक का सबसे लंबा रिकॉर्ड है। इससे पूर्व इस पद पर लंबे समय रहने का रिकार्ड देवकी नंदन मित्तल ने बनाया था।
आपको बताते चले कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के संसदीय इतिहास में सचिवों और प्रमुख सचिवों की सेवा एक अनुपम उदाहरण है। 15 नवंबर 1909 से लेकर आज तक चले इस लंबे सफर में कई विद्वानों ने अपनी सेवा से संस्था को मजबूती दी है।आजादी से पहले विल्फ्रेड किंग पोर्टर ने 15 नवंबर 1909 से 15 दिसंबर 1928 तक पूरे 19 वर्ष तक सेवा की। उनके बाद आर.बी. सुरेन्द्र नाथ घोष ने 16 दिसंबर 1928 से 31 मार्च 1937 तक 9 वर्ष सेवा दी। जी.एस.के. हैदरी ने 1 अप्रैल 1937 से 25 जनवरी 1947 तक 10 वर्ष तक पद संभाला। स्वतंत्रता के बाद कैलास चंद्र भटनागर ने 26 जनवरी 1947 से 8 फरवरी 1956 तक कुल 9 वर्ष की सेवा की।
इसके बाद आता है स्वतंत्र भारत का सबसे चर्चित रिकॉर्ड देवकी नंदन मित्तल ने 9 फरवरी 1956 से 1 मार्च 1974 तक पूरे 18 वर्ष तक सचिव विधानसभा के पद पर सेवा करके एक मिसाल कायम की। उनके बाद सत्य प्रिय सिंह (2 मार्च 1974 से 31 जनवरी 1983 तक 9 वर्ष), भाल चंद्र शुक्ल (1 फरवरी 1983 से 30 जून 1991 तक 8 वर्ष), प्रेम चंद सक्सेना (1 जुलाई 1991 से 31 अगस्त 1999 तक 8 वर्ष) और राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय (1 सितंबर 1999 से 5 नवंबर 2002 तक 3 वर्ष) ने अपनी सेवाएं दीं।
प्रमुख सचिव पद पर राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय ने 6 नवंबर 2002 से 29 जुलाई 2008 तक 6 वर्ष सेवा की। वर्तमान में प्रदीप कुमार दुबे 30 जुलाई 2008 से लगातार सेवा दे रहे हैं और अब तक 18 वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, जो यूपी विधानसभा के पूरे इतिहास में सबसे लंबे निरंतर सेवा रिकॉर्ड में शामिल है।प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप दुबे संसदीय ज्ञान मैं विशेषता हासिल कर रखी है जिसके कारण पूर्ववर्ती सरकारों में भी उनकी सेवाओं की आवश्यकता होती थी, वर्तमान सरकार भी श्री दुबे जी संसदीय ज्ञान का सेवाएं ले रही हैं.
प्रदीप दुबे द्वारा विधानसभा की प्रक्रिया नियमावली पुनः विरचित की गई है। यू पी विधान सभा के वर्तमान अध्यक्ष के कार्यकाल विभिन्न नवाचार किये गए है जो पूरे देश में चर्चा जा विषय बने हुए है । अध्यक्ष महोदय, ये कहते हैं कि प्रदीप दुबे के बिना ये संभव नहीं था। प्रक्रिया नियमावली की व्याख्या प्रमुख सचिव के रूप में श्री दुबे द्वारा रचित की गई है , जिसका विमोचन माननीय अध्यक्ष लोक सभा श्री ओम बिरला द्वारा किया गया । इस पुस्तक की पूरे देश की विधायिकाओं में सराहना की गई है। अन्य विधानसभाओं में भी इसका अनुसरण किया जा रहा है। आने वाले समय में ये पुस्तक नए विधायकों , छात्रों एवं विधि विशेषज्ञों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। श्री दुबे की यह पुस्तक कौल एवं शक्धार की पुस्तक की तर्ज पर लिखी गई है जो कि संसदीय प्रक्रिया पर देश की सर्वोत्तम पुस्तक है। श्री दुबे के इस योगदान का आने वाले कई वर्षों तक यूपी विधानसभा में उल्लेख किया जाएगा।
विधायिकाओं में सचिवों का कार्यकाल अध्यक्ष के प्रसाद पर्यंत होता है। देश की सभी विधायिकाओं में और लोक सभा तथा राज्यसभा में भी सेवानिवृत्त अधिकारी अपने अनुभव के कारण लंबे समय तक कार्य करते रहे है। श्री प्रदीप दुबे देश के सर्वश्रेष्ठ विधायी विशेषज्ञों में से एक हैं। अन्य राज्यों की विधानसभाओं द्वारा भी आवश्यकता पड़ने पर उनका परामर्श लिया जाता है। उत्तर प्रदेश के लिए यह गौरव की बात है।
संक्षेप में सेवा अवधि:
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इ-पेपर: Divya Sandesh
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