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UP Bureaucracy: प्रमोटी IAS नीरज शुक्ला के ‘मैनेजमेंट’ पर मुख्य सचिव निहाल!

साढ़े छह साल से काबिज हैं अपर आवास आयुक्त एवं सचिव पद पर

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  • घपलों की फाइलों को गोल-गोल घुमाने के माहिर खिलाड़ी

लखनऊ। आप कैसे महत्वपूर्ण और मलाईदार पद पर लंबे समय तक बने रह सकते हैं? नौकरशाही के किस ‘गॉडफादर’ की आवश्यकता पड़ती है? उससे किस तरह से मैनेजमेंट किया जाए? इसका आप 2012 बैच के प्रमोटी आईएएस डा. नीरज शुक्ला से पाठ सीख सकते हैं। वे बीते छह साल से अधिक समय से आवास एवं विकास परिषद बोर्ड के अपर आवास आयुक्त एवं सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर काबिज हैं। कितने आवास आयुक्त और प्रमुख सचिव आए और बदल गए? लेकिन  डा. नीरज शुक्ला को हिला नहीं सका। वैसे तो ‘इतनी काबिलियत’ वाले आईएएस अफसरों का टोटा है। लेकिन उन्होंने यह इतिहास अपने ‘बिजनेस मैनेजमेंट’ की काबिलियत के बल पर बनाया है। जहां उनकी अनियमितताओं की फाइल को गोल-गोल घुमाने की कला के चर्चे आवास एवं विकास परिषद के कोने-कोने से गूंज रही है वहीं बड़े-बड़े बिल्डरों के आंख के तारे बने हुए हैं। जबकि डा. नीरज की कार्यप्रणाली को लेकर खूब शिकायतें हुईं, लेकिन सब सत्ता के गलियारों में जाकर कुंद हो गईं। इस मुद्दे पर मुख्य सचिव से लेकर प्रमुख सचिव तक चुप्पी साध लेते हैं।

मलाईदार पदों पर रहने का रिकार्ड

उल्लेखनीय है कि 2012 बैच के प्रमोटी आईएएस अफसर डा. नीरज शुक्ला 3 सितंबर 2020 से अपर आवास आयुक्त एवं सचिव के पद पर तैनात हैं। इससे पूर्व वे विशेष सचिव चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग, अयोध्या नगर निगम आयुक्त और अयोध्या विकास प्राधिकरण के वीसी पद पर तैनात रह चुके हैं। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं डा. नीरज शुक्ला इतने प्रभावशाली हैं कि उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती मिली। बीते साढ़े छह साल से आवास एवं विकास परिषद में तैनात हैं। वैसे वे योगी सरकार में सबसे अधिक समय तक एक ही पद पर रिकॉर्ड बनाने वाले इकलौते अफसर हैं।

गोल-गोल घूमती हैं भ्रष्टाचार की फाइलें

आवास एवं विकास परिषद के सूत्रों का कहना है कि अपर आवास आयुक्त एवं सचिव डा. नीरज शुक्ला की परिषद से लेकर शासन तक तूती बोलती है। ऐसा कोई काम नहीं है, जिससे गोल-गोल घूमाया न जा सके। इसी कला के बल पर मुख्य सचिव से लेकर प्रमुख सचिव तक अफसर नतमस्तक हैं। वैसे तो इन महोदय ने अयोध्या में काफी कारनामे अंजाम दिए हैं। लेकिन इनका सबसे अधिक प्रचलित कारनामा गाजियाबाद की सिद्घार्थ विहार योजना है।

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इस बड़े घपले की शिकायत भाजपा नेता पंडित सुनील भराला ने 5 अगस्त 2022 को की थी। इस पर पूर्व प्रमुख सचिव आवास ने 28 जुलाई 2022 को एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। 5 अगस्त 2022 को मंडलायुक्त मेरठ मंडल की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। इस पर 22 फरवरी 2023 को पूर्व मण्डलायुक्त सेल्वा कुमारी ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दी। जांच रिपोर्ट में  उल्लेख किया गया कि उत्तर प्रदेश सहकारी नियमावली के नियम 397 का उल्लंघन हुआ है।

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सहकारिता विभाग ने जो एनओसी जारी की है, वह त्रुटिपूर्ण है। 2 जून 2023 को गाजियाबाद और गौतम बुद्घ नगर की विभिन्न सहकारी समितियों को निर्गत एनओसी की समीक्षा की गई थी। सहकारिता विभाग ने एनओसी के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। साथ ही सहकारी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ही चेतावनी भी दी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सहकारिता विभाग के गाजियाबाद और गौतमबुद्घ नगर के दोनों कार्यालय ज्ञापों के अध्ययन से पता चलता है कि बिल्डर व समिति का सांठगांठ रहा। बिल्डर्स और डेवलपर्स द्वारा निबंधक सहकारिता के अनुमोदित अनुबंध के बाद ही रेरा में पंजीकरण कर  प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं। रेरा अथॉरिटी में किया गया पंजीकरण अवैध है। आवास एवं विकास परिषद ने रेरा का पंजीकरण निरस्त कराने की कोई कार्रवाई नहीं की। इस प्रकरण पर आवास एवं विकास परिषद ने कोई भी कार्रवाई नहीं की है।

लाडले अफसर के कारनामें पर चुप्पी

शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि प्रमोटी आईएएस डा. नीरज शुक्ला मुख्य सचिव एस.पी. गोयल के काफी करीब हैं। इस वजह से प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद भी शांत रहते हैं। बिल्डरों से भी काफी घनिष्ठता है। जबकि कई शिकायतें हुई हैं। लेकिन उन पर कोई सुनवाई तक नहीं हुई है। इस संबंध में अपर आवास आयुक्त एवं सचिव डा. नीरज शुक्ला से संपर्क किया गया। लेकिन उन्होंने कोई भी जवाब नहीं दिया। प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद से टेलीफ़ोनिक संबंध में कहा कि वे अभी मीटिंग में हैं। बाद में बात करेंगे। उसके बाद कोई संपर्क नहीं किया गया। 

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